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Raebareli News: खुद आसमां छू नेत्रहीन दीपू दृष्टिहीनों को दे रहा नई रोशनी

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हजारों साल नरगिस अपनी बे-नूरी पर रोती है...
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बड़ी मुश्किल से होता है, चमन में दीदावर पैदा...
मशहूर शायर अल्लामा इकबाल का ये शेर रायबरेली के दिव्यांग ‘दीपू’ पर बिल्कुल सटीक बैठता है। बेसिक शिक्षा विभाग के प्री-इंटीग्रेशन कैंप में साल 2011-12 में ब्रेल लिपि से पढ़ाई शुरू करने वाले दीपू ने सफलता की बुलंदियों को छू लिया।
आंखों के सामने अंधेरा हो, फिर भी उजाले का दीप जलाने की दीपू की ये कोशिश काबिलेगौर है। वर्तमान में स्टेट बैंक में बिजनेस सलाहकार के पद पर तैनात दीपू का चयन रेलवे में ग्रुप-सी के लिए हो गया है। उसने अपने जैसे दृष्टिहीन बच्चों को नई रोशनी भी देने का काम शुरू किया है। आईएटीएफ-24 नाम से ऐप बनाकर नेत्रहीन बच्चों अपने जैसा कामयाब बनाने की कोशिश कर रहा है।
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शिवगढ़ क्षेत्र के शिवदयाल खेड़ा निवासी किसान दिनेश कुमार के बेटे दीपू जन्म से ही अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं। दीपू ने वर्ष 2011-12 में प्री-इंटीग्रेशन कैंप में दाखिला लिया और ब्रेल लिपि से अपनी पढ़ाई की शुरुआत की।
परिषदीय पढ़ाई पूरी करने के बाद चित्रकूट के तुलसी प्रज्ञाच्क्षु विद्यालय से इंटरमीडिएट व रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय से स्नातक के साथ कंप्यूटर की पढ़ाई की। एआईटी स्टेनोग्रॉफी में राष्ट्रीय दृष्टि बाधित संस्थान से टॉप किया। उसे मध्यप्रदेश सरकार से 25 हजार का पुरस्कार मिल चुका है। वर्तमान समय में दीपू एसबीआई शिवगढ़ शाखा में बिजनेस सलाहकार के पद पर काम कर रहे हैं। रेलवे में चयन होने के बाद अब वह बैंक की नौकरी छोड़ने का मूड बना चुके हैं।
नेत्रहीन दीपू पटेल का कहना है कि पहली बार कैंप में दाखिला लेने पर अंदाजा नहीं था कि कैसी लाइफ होगी, लेकिन आज बहुत अचीव कर लिया और आगे भी कुछ पाना चाहते हैं। उनका कहना है कि नेत्रहीन बच्चों को अपने जैसा कामयाब बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आईएटीएफ-24 नाम से एक ऐप बनाकर कई बेहतरीन और अपडेट फ़ीचर उपलब्ध कराया है। ऐप में नेत्रहीनों के लिए जरूरी सारी तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया है। दीपू का कहना है कि दृष्टिहीन खुद को कमजोर न समझें। हौसला रखें और मेहनत करके अच्छा मुकाम प्राप्त कर लें।
डीएम ने किया सम्मानित, दीपू की खूब की तारीफ
दृष्टिहीन बच्चों में टैबलेट व अन्य पढ़ाई के संसाधन के वितरण के मौके पर डीएम माला श्रीवास्तव दृष्टिहीन दीपू की सफलता को लोहा मान चुकी हैं। उन्होंने दीपू को सम्मानित करने के साथ ही उनसे अदम्य साहस, विश्वास और मेहनत की तारीफ कर चुकी हैं। डीएम का कहना है कि दीपू अन्य नेत्रहीन बच्चों के लिए एक मिसाल हैं। सभी को उनकी मेहनत, लगन और सफलता से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
129 दृष्टिहीनों व 4262 दिव्यांगों को मिल रही शिक्षा
परिषदीय स्कूलों में दृष्टिहीन बच्चों को ब्रेल विधि से पढ़ाई कराई जा रही है। समेकित शिक्षा की जिला समन्वयक शुभा त्रिपाठी का कहना है कि जिले के विभिन्न परिषदीय स्कूलों में 129 दृष्टिहीन व 4263 अन्य दिव्यांग बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। ब्रेल लिपि के 59 बच्चों को टैबलेट, 30 बच्चों को ब्रेल बुक और 20 बच्चों को ब्रेल किट का वितरण किया गया है। सभी दृष्टिहीन बच्चों तक ब्रेल विधि की पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराकर गांव स्तर के स्कूलों में बेहतर शिक्षा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
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वर्तमान समय में प्री-इंटीग्रेशन कैंप का आयोजन नहीं हो रहा है, लेकिन 129 दृष्टिहीन और 4263 दिव्यांग बच्चों का विभिन्न परिषदीय स्कूलों में दाखिला कराकर बेसिक शिक्षा स्तर की पढ़ाई मुहैया कराई जा रही है। ब्रेल लिपि की पाठ्य सामग्री भी स्कूलों को उपलब्ध कराई गई है।
- एसपी सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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