रायबरेली। मिल एरिया थाना क्षेत्र में बुधवार तड़के हुुुई मुठभेड़ में पैर में गोली लगने से एक बदमाश घायल हो गया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जबकि उसके साथी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने चार लाख कीमत के जेवरात समेत अन्य सामान बरामद किया है। ये बदमाश सराफा व्यवसायी के साथ हुई लूट की घटना के मामले में फरार चल रहे थे।
पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि सर्वोदय नगर निवासी सराफा व्यवसायी अनिल वर्मा के साथ 29 अक्तूबर को आठ लाख की लूट हो गई थी। तीन नवंबर को लूट में शामिल चार बदमाशों को पकड़कर जेल भेजा गया था, जबकि दो बदमाश फरार चल रहे थे।
इनकी गिरफ्तारी के लिए अपर पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव, सीओ सदर वंदना सिंह की अगुवाई में पुलिस टीम गठित की गई थी। बुधवार तड़के पांच बजे सूूचना मिली कि फरार बदमाश शारदा नहर सुल्तानपुर रोड पर मौजूद हैं। सूचना पर एएसपी, सीओ के अलावा मिल एरिया थानेदार रेेखा सिंह, एसओजी प्रभारी प्रवीर गौतम पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए।
पुलिस को आते देख बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। इस दौरान मिल एरिया थाना क्षेत्र के सीकी सलेमपुर गांव निवासी रोहित यादव के बाएं पैर में गोली लग गई। वहीं मौके से लखनऊ जिले के आशियाना थाना क्षेत्र के बंगला बाजार गांव निवासी रितेश उर्फ पिंटू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
इन दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने सोने की चार चेन, कान के 10 टॉप्स, सात लॉकेट, अंगूूठी समेत चार लाख कीमत के जेवरात, घटना में इस्तेमाल की जाने वाली बाइक और तमंचा बरामद किया है। एसपी ने बताया कि घायल रोहित के खिलाफ जिले के अलग-अलग थानों में पांच आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। एसपी ने बताया कि काफी समय से लुटेरे जिले में सक्रिय थे और लूट की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे।
पहले करते थे रेकी, फिर घटनाओं के देते थे अंजाम
अपर पुलिस अधीक्षक के मुताबिक पकड़े गए लुटेरों का एक संगठित गिरोह है। गिरोह में दो-तीन लोग बाइक पर सवार होते हैैं और मुख्य रूप से सराफा व्यापारियों को टारगेट करके लूट की घटनाओं को अंजाम देते थे। जिस सराफा व्यवसायी के साथ लूट की घटना को अंजाम देना होता था, पहले लुटेरे उसके संबंध में पूरी जानकारी कर लेते थे।
किस मार्ग से सराफा व्यवसायी का आना-जाना रहता था, उसकी पूरी रेकी कर लेते थे। इसके बाद लूट की घटनाओं को अंजाम देते थे। लूट की घटना को अंजाम देने के बाद संकरे रास्ते से बाइक पर सवार होकर भाग जाते थे। इससे उनके बारे में किसी को कुछ पता नहीं चल पाता था।