लालगंज (रायबरेली)। आधुनिक रेल डिब्बा कारखाने से 19 कोचों के रैक को लेकर जा रहा इंजन और ब्रेकयान गेट नंबर 71 बी के निकट बुधवार सुबह डिरेल हो गया। हादसा साइड लाइन में होने के कारण रेल यातायात पर इसका कोई असर नहीं हुआ। सूचना पर यातायात निरीक्षक और रेलवे विभाग के इंजीनियरों ने टेक्निकल टीम ने इंजन को वापस पटरी पर लाने का काम शुरू कर दिया है।
आधुनिक रेल डिब्बा कारखाने में निर्मित इकोनाॅमी, वातानुकूलित टू टियर और स्लीपर के 19 कोचों का एक रैक लेकर रेल इंजन बुधवार सुबह 5:25 पर गेट नंबर 71बी के शंट पॉइंट के निकट बेपटरी हो गया। इंजन के पटरी से उतरने पर तेज धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग सहम गए।
गेटमैन कृष्णा ने बताया कि 5:26 पर गेट से ट्रेन संख्या 04153 कानपुर-रायबरेली पैसेंजर गुजरी। रैक लेकर जा रही ट्रेन लाइन पर एक मिनट पहले ही आ गई थी। बताया कि घटना की सूचना स्टेशन अधीक्षक को दी गई।
यातायात निरीक्षक बालमुकुंद वर्मा व एसएसई शुभम श्रीवास्तव टेक्निकल टीम के साथ मौके पर पहुंचे और ट्रेन को पटरी पर वापस लाने का कार्य शुरू कराया। दोपहर करीब 12:50 पर टेक्निकल टीम के प्रयास से रेल इंजन को दोबारा पटरी पर ला दिया गया। ट्रेन के ड्राइवर आरआर मीणा ने बताया कि कोहरे के कारण शंट सिग्नल नहीं दिखा, जिससे रेल लाइन दो पर शंट प्वाइंट के पास इंजन और ब्रेक यान पटरी से उतर गया।
जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित
स्टेशन अधीक्षक डीके सिंह ने बताया कि हादसे की सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई थी। मंडल कार्यालय की ज्वाइंट टीम ने जांच के लिए पांच सदस्यीय अफसरों की टीम गठित की गई। टीम में सीएलआई पीके सिंह, एसएसई टीवे सौरभ, यातायात निरीक्षक बाल मुकुंद वर्मा, सीएनडब्ल्यू एके यादव और एसएसई आनंद कुमार शामिल हैं। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया ट्रेन चालक के सिग्नल को ओवर शूट किए जाने को घटना का कारण माना है।
रेल गेट बार-बार बंद होने के कारण सड़क यातायात रहा प्रभावित
रेल इंजन के डिरेल होने से बुधवार को रेल लाइन पर मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक रही। जिसके कारण बार-बार रेलवे क्रॉसिंग बंद करनी पड़ी। इससे कस्बे में जाम की स्थिति बनी और वाहन चालकों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रायबरेली रोड, बछरावां रोड पर दिन में कई बार वाहनों की लंबी-लंबी लाइनें लगी, जिससे परेशानी हुई। स्टेशन अधीक्षक डीके सिंह ने बताया कि बुधवार को रेल लाइन पर मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक रही। साथ ही मरम्मत कार्य के कारण ट्रेनों को धीमी गति से गुजारा गया।