रायबरेली। सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने नहरों से निकाली सिल्ट बिना नीलामी बेच डाली। इस साल सिल्ट साफ कराने के नाम पर पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं 30 लाख रुपये में सिल्ट की नीलामी की गई।
स्थानीय निवासी सलोल तहसील के सुलबरसा गांव निवासी रामकेश, मनीराम और जगतपुर के बसंत लाल ने आरोप लगाया कि अभियंताओं की शह पर हुए मामले की अगर जांच हो तो धांधली सामने आ सकती है। कहा, सिंचाई खंड दक्षिणी में इस बार 1,144 किलोमीटर माइनर और रजबहों की सफाई के नाम पर पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए।
विभाग ने 35 किलोमीटर रजबहों की नीलामी 30 लाख रुपये में की थी। जबकि नीलामी से ज्यादा सिल्ट ऐसे ही बेच दी। रायबरेली रजबहा, बरवारीपुर, नीमटीकर, सलोन रजबहा, सूची रजबहा व राजामऊ रजबहा आदि में नीलामी से ज्यादा सिल्ट गायब है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कराने की मांग की है।
पटरियों की मिट्टी तक हो गई गायब
नीलामी केवल सिल्ट की होती है, लेकिन नहरों की पटरी तक उठा ली गई है। बछरावां, महराजगंज, अमावां, सलोन क्षेत्र की कई नहरों की पटरियां तक गायब हैं। यही वजह है कि पटरियां कटने से किसानों की फसल तबाह हो रही है।