रायबरेली। जिला कारागार में तैनात बंदीरक्षक मुकेश कुमार दुबे की पिटाई के मामले की जांच के लिए बुधवार को डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी पहुंचे। उन्होंने जेल अफसरों समेत स्टाफ के 42 लोगों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए।
जिला कारागार में तैनात बंदीरक्षक से सोमवार शाम जेल में ही तैनात साथी बंदीरक्षक विजय सिंह, सौरभ वर्मा, परवेश सिंह, राजीव शुक्ला, जसवंत तोमर ने मारपीट की थी। मारपीट करने वाले बंदीरक्षकों के खिलाफ सदर कोतवाली में एफआईआर दर्ज करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
बवाल का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। बुधवार सुबह 10 बजे डीआईजी जेल मामले की जांच के लिए जिला कारागार पहुंचे। उन्होने जेल अधीक्षक अविनाश गौतम, जेलर सत्य प्रकाश सिंह, डिप्टी जेलर समेत स्टाफ के 42 लोगों के बयान दर्ज किए। डीआईजी ने घायल बंदीरक्षक की पत्नी रुचि दुबे से एक घंटे तक पूछताछ करके उनके बयान दर्ज किए।
मेरे परिवार को मार डालने की दी धमकी
बंदीरक्षक की पत्नी रुचि ने मीडिया को बताया कि उनके पति से आरोपी बंदीरक्षक मनमाना काम कराना चाहते थे। मना करने पर पति के साथ मारपीट की गई। आरोपी बंदीरक्षकों ने उसे व उसके परिवार को जान से मार डालने की धमकी दी है। उसे न्याय मिलना चाहिए। वह मुख्यमंत्री से भी मामले की शिकायत करेगी।
बख्शे नहीं जाएंगे दोषी : संजीव
डीआईजी जेल ने कहा कि बंदीरक्षक के साथ हुई मारपीट के मामले की जांच की जा रही है। जेल के अंदर कैंटीन संचालित कराने की जिम्मेदारी डिप्टी जेलर के पास होती है। इसके संचालन में अन्य लोग भी सहयोग करते हैं। बंदीरक्षकों को निलंबित करके उनके खिलाफ विभागीय जांच कराई जा रही है। जेल अफसरों की भूमिका की भी जांच चल रही है। पूरे प्रकरण में जो भी दोषी मिलेगा, वह बख्शा नहीं जाएगा।