देश की सबसे हॉट सीट में शामिल रायबरेली कांग्रेस और भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गई है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दोनों पक्षों के दिग्गज नेता लगातार वहां डेरा डाले हैं। सीट की अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि दो दिन पहले रायबरेली पहुंचे गृहमंत्री अमित शाह ने जनसभा में कहा, ‘यदि एक सीट जीतकर 400 पार का मतलब पूरा हो जाए तो वह करना चाहिए या नहीं..।’ भीड़ से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिलने पर उन्होंने कहा, 'रायबरेली में कमल खिला दो, चार सौ पार अपने आप हो जाएगा।' कांग्रेस ने इस अहम सीट पर अपने कद्दावर नेता राहुल गांधी को उतारा है, ऐसे में पूरी कांग्रेस पार्टी गढ़ बचाने में जुटी है।
कांग्रेस के साथ सपा की भी ताकत
सरेनी के सपा कार्यकर्ता योगेश यादव कहते हैं कि प्रियंका जी अपने भाषण में अखिलेश भैया (पूर्व सीएम) का नाम तक नहीं लेती हैं। लेकिन, भैया का संदेश है कि पूरी ईमानदारी से लगना है, तो हम दिन रात किए लगे हैं। यादव, पासी, मुस्लिम बिल्कुल एकजुट हैं, ब्राह्मण भी साथ हैं, ऐसे में सीट जिताकर देंगे।
भाजपा की किलेबंदी
ये मुद्दे डाल रहे असर
इस समर के योद्धा
राहुल गांधी : पिछला चुनाव अमेठी में केंद्रीय मंत्री स्मृति जूबिन इरानी से हारने के बाद इस बार अपनी मां सोनिया गांधी की सीट रायबरेली से मैदान में हैं। इनके पक्ष की सबसे बड़ी बात यह है कि अभी भी क्षेत्र का एक तबका है जो गांधी फैमिली का उत्तराधिकारी होने से राहुल को पीएम बनने का सपना देखता है। लेकिन, कई जगह लोग कहते हैं कि क्या गारंटी है कि चुनाव जीतने के बाद रायबरेली नहीं छोड़ेंगे? केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ रहे हैं।
दिनेश प्रताप सिंह : पिछला चुनाव सोनिया गांधी से हारे थे, लेकिन उनकी जीत का अंतर घटाने में सफल हुए थे। स्थानीय स्तर पर सुलभ होने और मंत्री के रूप में लोगों के बीच उपलब्धता पक्ष में जाती है। पिछले पांच साल अगला चुनाव लड़ने की उम्मीद में सक्रिय रहे हैं। सत्ताधारी दल का होने से तमाम प्रधानों और बीडीसी सदस्यों का नेटवर्क भी काम आ रहा है। परिवार के कई सदस्यों के व्यवहार से कई जगह नाराजगी भी है।
ठाकुर प्रसाद यादव : बसपा से हैं। यादव, सरेनी विधानसभा सीट से दो बार भाग्य आजमा चुके हैं। करीब 23 फीसदी ओबीसी जातियों वाली इस सीट पर सपा प्रत्याशी के मैदान में न होने से बसपा ने यादव उम्मीदवार का दांव चला है। सपा व कांग्रेस गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे हैं।