रायबरेली। गरीबों को पक्की छत दिलाने के लिए बनाए गए आवासों में जमकर भ्रष्टाचार किया गया। सारे मानक ताक पर रख दिए गए। शिकायत पर जांच कराई गई तो खुलासा हुआ कि आवास निर्माण में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया।
अब 15 साल बाद लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता की तहरीर पर मिल एरिया थाने में मंगलवार रात तत्कालीन ठेकेदार और तीन अधिकारियों के खिलाफ शासन के धन का दुरुपयोग करने और क्षति पहुंचाने का केस दर्ज कराया गया है।
शहर क्षेत्र के चक धौरहरा (गड़रियन का पुरवा) में आईएचएसडीपी योजना के तहत 2007 में कार्यदायी संस्था जिला नगरीय विकास अभिकरण ने 100 आवासों का निर्माण कराया था। 2010 में आवासों का निर्माण पूरा हुआ था। इसके बाद कार्यदायी संस्था ने नगर पालिका को इन आवासों को हैंडओवर कर दिया था।
आवासों के निर्माण पर एक करोड़ 37 लाख रुपये खर्च हुए थे। शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन की तरफ से इसकी जांच कराई गई। जांच में पता चला कि आवास निर्माण में मानकों का ध्यान न रखने से आवास समय से पहले ही जर्जर हो गए।
मिल एरिया थानेदार रेखा सिंह का कहना है कि कुशीनगर जिले के चैन निवासी लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता संतोष कुमार राय की तहरीर पर संबंधित तत्कालीन ठेकेदार अज्ञात, तकनीकी अन्वेषक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के अवर अभियंता अरुण कुुमार शुक्ला, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता डीपी मिश्र, उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निर्माण निगम के अधिशासी अभियंता आरएन सिद्दीकी के खिलाफ शासन के धन का दुरुपयोग करने और उसे क्षति पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया है। प्रकरण की जांच शुरू करा दी गई है।