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बुखार से नवजात समेत दो की मौत, 25 मरीज भर्ती

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रायबरेली। जिले में संक्रामक रोगों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। जेई, डेंगू, एईएस, मलेरिया के साथ ही बुखार ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बुखार के चपेट में आने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए चार दिन के नवजात समेत दो मरीजों की गुरुवार को मौत हो गई। इसके अलावा पिछले 24 घंटे में बुखार से ग्रसित 25 मरीजों को भर्ती कराया गया है। जिला अस्पताल की ओपीडी में गुरुवार को 1800 मरीज पहुंचे, इनमें से ज्यादातर मरीज बुखार से पीड़ित थे।
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सलोन क्षेत्र के सूची गांव निवासी कोमल सिंह के चार दिन के नवजात को बुखार आने पर बुधवार रात जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर गुरुवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इसके अलावा ऊंचाहार क्षेत्र के वंशपुर मजरे इटौरा बुजुर्ग निवासी जगतपाल (60) को बुखार के चपेट में आने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार को बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। इसके अलावा गुरुवार को शहर के अमृत नगर निवासी इंदू (14), तिलियाकोट निवासी फरहीन (22), लोहानीपुर निवासी अमित (35), रतापुर निवासी परसू (28), अलीमियां चौराहा निवासी हिना (27), अंदरूनकिला निवासी गुड्डू (45), कैलाशपुरी निवासी आफताब (24), सैयद राजन निवासी राखी (27) को तेज बुखार की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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गुरुबख्शगंज निवासी देवता प्रसाद (60), डिडौली निवासी जयकरन (17), उत्तरागौरी लालगंज निवासी श्यामकली (70), पूरे बैसन गुरुबख्शगंज निवासी मानसी (15), रघुवीरगंज हरचंदपुर निवासी शिवपती (50), लालगंज निवासी इंदर (9), मोहनगंज निवासी कीर्ति (19), हरचंदपुर निवासी अभिषेक (28), गोपालपुर निवासी उर्मिला (55), मोहलिया निवासी मयंक (4), बघई महराजगंज निवासी हर्षिता (2) समेत 25 मरीजों को भी बुखार से ग्रसित होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं मौसम में बदलाव के साथ ही जिला अस्पताल की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। गुरुवार को करीब 1800 मरीज ओपीडी में पहुंचे। इसमें आधे से अधिक बुखार से पीड़ित थे।
ओपीडी में मरीज बढ़े, लेकिन दवाओं का संकट बरकरार
जिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी और पीएचसी की ओपीडी में विभिन्न संक्रामक रोगियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन दवाओं का संकट बरकरार है। यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन पर्याप्त दवाएं उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है।
जिला अस्पताल में तो लोकल परचेज के सहारे किसी तरह व्यवस्था को व्यवस्थित रखने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन सीएचसी व पीएचसी में लोकल परचेज की सुविधा न होने के कारण दवाओं का भारी संकट है। मरीजों को बाजार से महंगे रेट पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों की जेब ढीली हो रही है। सीजन पर मरीजों की समस्याओं को सुनने के लिए कोई भी सामने नहीं आ रहा है।
मौसम में बदलाव के साथ ही संक्रामक बीमारियों का कहर बढ़ गया है। जुकाम व बुखार के मरीज बढ़े हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भर्ती करके इलाज की सुविधा दी जा रही है। ओपीडी में भी आने वाले मरीजों के लिए दवाओं के बंदोबस्त किए गए हैं। जो दवाएं खत्म हो रही हैं, उन्हें लोकल परचेज से मंगवाया जा रहा है।
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डॉ. महेंद्र मौर्या, सीएमएस, जिला अस्पताल
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