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पांच गुना बढ़ी डिमांड, पैरासिटामॉल व एंटीबायोटेक दवाओं का संकट

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रायबरेली। जिले में मच्छर जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ने के साथ ही सरकारी अस्पतालों में पैरासिटामॉल समेत अन्य जरूरी दवाओं की खपत काफी बढ़ गई है। सरकारी अस्पतालों में हर रोज बंटने वाली पैरासिटामॉल टैबलेट की 20 हजार की खपत अब बढ़कर एक लाख के पार तक पहुंच गई है। इससे अस्पतालों में दवा सप्लाई के लिए बने भंडारण डिपो में जरूरी दवाओं की किल्लत होने लगी है।
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जिले में डेंगू, एईएस, मलेरिया, बुखार सहित अन्य संक्रामक रोगों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में पैरासिटामॉल, एंटीबायटिक, एंटी एलर्जिक सहित अन्य दवाओं की खपत व मांग तेजी से बढ़ी है।
जिले के सरकारी अस्पतालों को पहले मुख्य वितरण डिपो से चार से पांच लाख पैरासिटामॉल की टैबलेट दी जाती थी, लेकिन वर्तमान समय में अस्पतालों को एक बार में 15 लाख से अधिक टैबलेट वितरण के लिए देना पड़ रही है।
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फिलहाल विभागीय अधिकारी डिपो में पैरासिटामॉल की प्रचुर उपलब्धता होने का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि सभी सीएचसी को 50-50 हजार, पीएचसी को 10-10 हजार और जिला अस्पताल को एक लाख पैरासिटामॉल (पीसीएम) की दवा देने के बाद भी गोदाम में 30 लाख टैबलेट उपलब्ध है।
अन्य जरूरी दवाओं को मंगवाने के लिए डिमांड मुख्यालय भेजी गई है। सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि किसी भी सीएचसी और पीएचसी में बुखार के इलाज में दी जाने वाली दवाओं की कोई कमी नहीं है। अन्य दवाओं की कमी को भी दूर कराया जा रहा है।
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