रायबरेली। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त मिलने वाली दवाओं की सप्लाई बीते दो माह से बाधित बनी है। इसके चलते ही उल्टी-दस्त, वायरल व डेंगू बुखार के इस मौसम में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जरूरी दवाएं न मिल पाने से परेशानी उठानी पड़ रही है। मांग के अनुरूप केंद्रीय दवा भंडार डिपो से जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
बीते दो माह से पटरी से उतरी सप्लाई व्यवस्था के कारण सरकारी अस्पतालों में करीब 55 दवाओं का टोटा हो गया है। इसमें दर्द, शुगर व एलर्जी में दी जाने वाली सामान्य दवाओं से लेकर भर्ती मरीजों को मिलने वाले आरएल, एनएस व डीएनएस इंजेक्शन तक शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर के मधुबन रोड क्रासिंग पर संचालित भंडार डिपो से ही सरकारी अस्पतालों को मांग के अनुरूप दवाएं भेजी जाती हैं। दवाओं की व्यवस्था के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया होने के कारण सीएमएसडी से सीधे इस गोदाम को भी दवा मिलती है।
विभागीय स्तर पर बरती जा रही शिथिलता के चलते जिले को पिछले दो महीने से एंटी एलर्जी, दर्द, शुगर सहित अन्य बीमारियों के इलाज से जुड़ी 55 दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। डायरिया व अन्य रोगों के बढ़ते प्रकोप के कारण अस्पतालों में इलाज के लिए आरएल, एनएस व डीएनएस इंजेक्शन की जरूरत भी दो गुना तक बढ़ गई है। ऐसे में इनकी शार्ट सप्लाई के कारण भर्ती मरीजों को भी बाजार से महंगी कीमत पर दवा खरीद कर परेशान होना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में एलपी से चल रहा काम
कार्पोरेशन से जिला अस्पताल को भी पिछले दो महीने से पर्याप्त दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में सीएमएस के स्तर से लोकल परचेज (एलपी) के माध्यम से किसी तरह जरूरी दवाएं मंगा कर मरीजों को मुहैया कराई जा रही हैं। सीएमएस डॉ. महेंद्र मौर्या का कहना है कि जिन दवाओं की कमी हो रही है, उन्हें बाजार से खरीदकर मरीजों क बेहतर इलाज कराने का प्रयास किया जाता है। स्वीकारा कि वर्तमान में कार्पोरेशन से कम दवाएं मिल रही हैं।
यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन से सीधे सीएचसी और पीएचसी पर दवाएं पहुंचाई जाती है। कुछ दवाओं की अस्पतालों में समस्या है। दवाओं के लिए कॉर्पोरेशन को डिमांड भेजी गई है। जल्द ही दवाएं मिलने की उम्मीद है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ