रायबरेली। जिले में डेंगू से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बुधवार को एक साथ डेंगू संक्रमित 11 मरीज मिलने से दहशत फैल गई। जिला अस्पताल की प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने डेंगू मरीजों के घरों के आसपास एंटी लार्वा का छिड़काव किया।
डेंगू के ये सभी मरीज शहर के इंदिरा नगर, नेहरू नगर, रफी नगर, गांधी नगर, पुलिस लाइन, सत्यनगर के रहने वाले हैं। वहीं चार साल का एक मासूम स्क्रब टाइफस की चपेट में आ गया है। बच्चे को लखनऊ स्थित केजीएमयू में भर्ती कराया गया है। जिले में तीन माह डेंगू मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 81 हो गया है।
जिला अस्पताल की प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट में शहर के नेहरू नगर निवासी चेला सिंह (17), रतापुर निवासी अजय सिंह (53), सत्य नगर निवासी हासिल श्रीवास्तव (16), दक्षिणी जहानाबाद निवासी साहेब मुंजिला (16), पुलिस लाइन निवासी राजेश्वरी (50), तकियाकला निवासी महेश (47), गांधी नगर निवासी देवेेंद्र नारायण (50), रफी नगर निवासी निशा सिंह (57), शांति अपार्टमेंट निवासी राजन सिंह (40), इंदिरा नगर निवासी पुष्पादेवी (30), राघवेंद्र (27), सोमिल गुप्ता (18) डेंगू संक्रमित मिले हैं।
इसके अलावा महराजगंज क्षेत्र के अलादी का पुरवा निवासी दिवांक (4) को केजीएमयू लखनऊ में भर्ती कराया। जांच में बच्चे में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है। बच्चे का लखनऊ में इलाज चल रहा है।
प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें बुधवार को मरीजों की घर पहुंची। मॉस कांटेक्ट अभियान के साथ ही एंटी लॉर्वा का छिड़काव किया। मरीजों के परिवार के लोगों की सेहत भी जांची गई। जिला मलेरिया अधिकारी भीखुल्लाह ने बताया कि डेंगू व एईएस के सभी मरीज स्वस्थ हैं। मरीजों के घर के लोग भी स्वस्थ हैं। परिवार के लोगों के ब्लड की स्लाइड बनवाकर जांच कराई जा रही है।
घर के आसपास न जमा होने दें पानी,
जिला मलेरिया अधिकारी भीखुल्लाह ने बताया कि वायरस मच्छर के शरीर में प्रवेश करने से व्यक्ति डेंगू के चपेट में आ जाता है। सिर दर्द, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी लगना, आंखों के पीछे दर्द, कान की ग्रंथियों में सूजन, त्वचा पर लाल चकत्ते होना आदि डेंगू के प्रमुख लक्षण हैं। घर के आसपास पानी एकत्र न होने दें, क्योंकि ठहरे पानी में मच्छरों के लार्वा बढ़ते हैं। ज्यादातर समय पूरी बांह के कपड़े पहनें। किसी को भी लक्षण प्रतीत हों तो तुरंत नजदीक के अस्पताल पहुंचकर चिकित्सीय सलाह लें।
स्क्रब टाइफस के लक्षण व बचाव
झाड़ियों में जुएं के आकार के रहने वाले रिकेटसिया कीट के काटने से स्क्रब टाइफस होता है। जिस स्थान पर यह कीट काटता है, शरीर के उस स्थान पर फफोलेनुमा काली पपड़ी के निशान पड़ जाते हैं। बुखार 104 सेल्सियस से अधिक हो जाता है। कंपकंपी के साथ असहनीय जोड़ों में दर्द व शरीर टूटने लगता है। शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। इन कीटों से बचने की जरूरत है। प्रयास यही किया जाए कि बच्चों को धूल, मिट्टी और घास के संपर्क में आने से बचाया जाए। लक्षण प्रतीत हो तो चिकित्सक से सलाह जरूर लें। घर के आसपास गंदा पानी न रुकने दें।
डेंगू के नए 11 मरीज स्वस्थ हैं। स्क्रब टाइफस के चपेट में आए बच्चे का केजीयमयू लखनऊ में इलाज चल रहा है। मौसम में बदलाव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। संक्रामक रोगों का खतरा बढने के बाद लोग एहतियात बरतें और मच्छरों से बचने का प्रयास करें।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ