पीडब्ल्यूडी कार्यालय में बुधवार शाम टेंडर हथियाने को लेकर माननीयों के परिवारीजनों और उनके समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। विधायक पुत्र के प्रार्थनापत्र फाड़ने के बाद विवाद शुरू हुआ।
दोनों पक्षों में जमकर नोकझोंक और गालीगलौज हुई। इससे दफ्तर में अफरातफरी मच गई। चूंकि दोनों पक्ष सत्तादल के नेता और विधायक से जुड़े थे, इसलिए वहां मौजूद सिपाही भी सिर्फ मूकदर्शक बने रहे।
सूचना मिलने पर शहर कोतवाल शैलेंद्र त्रिपाठी पहुंचे। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद विवाद शांत हुआ। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड में बुधवार को करीब सवा पांच करोड़ रुपये के कार्य के लिए टेंडर फॉर्म बेचे जा रहे थे।
चार बजे तक टेंडर फॉर्म के लिए प्रार्थना पत्र जमा होने थे। इसके बाद फॉर्म बांटे जाने थे। एक सपा विधायक का बेटा और एक सपा नेता के समर्थक भी टेंडर फॉर्म लेने पहुंचे।
बताते हैं कि सपा विधायक के बेटे ने टेंडर फॉर्म के लिए प्रार्थना पत्र जमा कर दिया। इसके बाद अपराह्न करीब 3.55 बजे सपा नेता का एक समर्थक अपना प्रार्थना पत्र जमा करने पहुंच गया।
यह बात सपा विधायक के बेटे को रास न आई। वह चाह रहा था कि और कोई टेंडर फॉर्म न पाए। विधायक पुत्र ने सपा नेता के समर्थक का प्रार्थना पत्र फाड़ दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी।
यही नहीं जमकर नोकझोंक और गालीगलौज भी हुई। सूचना पर सपा नेता भी पहुंच गए। हालांकि वहां पर कोतवाली के सिपाही मौजूद थे, लेकिन एक तरफ से माननीय का बेटा था तो दूसरी तरफ सपा नेता का समर्थक।
इसलिए पुलिस कर्मी बीचबचाव की हिम्मत नहीं जुटा सके। बात और आगे बढ़ती, इससे पहले ही कोतवाल दल-बल के साथ मौके पर आ गए। तब कहीं जाकर विवाद शांत हुआ।
इस दौरान कार्यालय के बाबू और कर्मचारी सहमे हुए नजर आए। कोतवाल ने बताया कि सपा विधायक के बेटे और सपा नेता के समर्थक के बीच टेंडर फॉर्म लेने का प्रार्थना पत्र जमा करने को लेकर विवाद हुआ था।
बाद में दोनों पक्षों के प्रार्थना पत्र जमा करा दिए। तहरीर मिलने पर केस दर्ज किया जाएगा। अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार का कहना है कि मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया जाएगा। उनसे पुलिस ने भी घटना के बारे में जानकारी की।