जंतु विज्ञान एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री शिव प्रसाद यादव के काफिले की गाड़ी से घायल बालिका की गुरुवार की रात इलाज के दौरान लखनऊ ट्राॅमा सेंटर में मौत हो गई। गुरुवार को हादसे से गुस्साए परिवारीजनों और ग्रामीणों ने बछरावां थाने के सामने शव रखकर लखनऊ-इलाहाबाद राजमार्ग जाम कर दिया।
सभी ने रिपोर्ट न लिखने पर बछरावां एसओ विमल सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आरोप लगाया कि थानेदार मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए उन्हें तत्काल हटाया जाए। इसकी सूचना मिलने पर सीओ के साथ ही कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई।
पुलिस और लोगों के बीच कहासुनी भी हुई। सीओ ने रिपोर्ट दर्ज करने का आश्वासन दिया तो लोगों ने जाम हटाया। बाद में अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। एक घंटे तक हाईवे पर आवागमन बंद होने से राहगीर परेशान हुए।
गौरतलब है कि शिवगढ़ थाना क्षेत्र के हंसवा गांव की रहने वाली यासमीन बानो (11) पुत्री अकबर अली गुरुवार को मामा शमीम के साथ बछरावां कस्बे आ रही थी। इसी दौरान शिवगढ़ जा रहे राज्यमंत्री के काफिले की गाड़ी ने यासमीन बानो को टक्कर मार दी थी, जिससे वह घायल हो गई थी।
हालत गंभीर होने पर उसे सीएचसी के बाद लखनऊ ट्रामा सेंटर भेजा गया था, जहां रात में इलाज के दौरान यासमीन बानो की मौत हो गई। दोपहर बाद परिवारीजन शव लेकर बछरावां थाने पहुंचे। बालिका की मौत की जानकारी पर ग्रामीण भी पहुंच गए। आक्रोशित परिवारीजनों और ग्रामीणों ने थाने के सामने हाईवे पर जाम लगा दिया।
पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। ग्रामीणों का कहना था कि मंत्री के काफिले की गाड़ी से हादसा हुआ है। इसलिए थानेदार मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें तत्काल हटाया जाए। भाजपा नेता वीरेंद्र गौतम ने भी पहुंचकर विरोध जताया।
मृतका के पिता अकबर अली और मामा शमीम का कहना था कि 15 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। बवाल बढ़ने की सूचना पर सीओ महराजगंज गोपीनाथ सोनी के अलावा हरचंदपुर, महराजंगज, शिवगढ़ थाने की फोर्स पहुंच गई। सीओ ने परिवारीजनों और ग्रामीणों से बातचीत की और मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया।
सीओ के निर्देश पर मंत्री के काफिले की गाड़ी के अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। सीओ का कहना है कि रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। मामले में कार्रवाई की जाएगी। एक घंटे तक जाम लगने से हाईवे के दोनों किनारों पर काफी दूर तक वाहनों की कतारें लगी रही, जिससे मुसाफिरों को उमस भरी गर्मी में परेशानी का सामना करना पड़ा।
बालिका की मौत से परिवारीजनों के जहां आंसू नहीं थम रहे थे, वहीं बछरावां थानेदार की मनमानी को लेकर भी उनमें जबरदस्त गुस्सा व्याप्त था। पिता अकबर अली रोते हुए यही कह रहा था कि हादसे के दौरान यदि पुलिस तेजी दिखाती तो गाड़ी चालक पकड़ लिया जाता।
पर थानेदार यही कहते रहे कि मंत्री के काफिले की गाड़ी से हादसा नहीं हुआ। वह मामले को दबाने की कोशिश कर रहे थे। भांजी की मौत से मामा शमीम भी बिलख रहा था।