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साथियों को बचाने में हीरो बने दूसरी यूनिटों के मजदूर 18-19-50

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साथियों को बचाने में हीरो बने दूसरी यूनिटों के मजदूर
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रायबरेली। एनटीपीसी में हादसे के बाद मचे कोहराम में पास की यूनिट में काम कर रहे कई लोग घायलों के लिए मसीहा बन गए। अपनी जान की परवाह न करते हुए वे लोग मौके पर पहुंचे। राहत कार्य शुरू होने के पहले ही इन लोगों ने तमाम घायलों को दुर्घटनाग्रस्त यूनिट से बाहर निकाला और एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद हीरो बने ये मजदूर अभी भी वह मंजर याद कर थर-थर कांपने लगते हैं, फिर भी घटना के तुरंत बाद उन्होंने अपनी बहादुरी दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
एनटीपीसी की यूनिट नंबर 6 में बुधवार को ब्लास्ट हुआ तो वहां भगदड़ मच गई। हादसे के बाद मचे कोहराम को देख कोई वहां जाने को तैयार नहीं था। बुरी तरह झुलसे लोग बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे। यह देख पास की यूनिटों में काम कर रहे कुछ मजदूर अपनी जान की परवाह न करते हुए वहां पहुंच गए और घायलों को बाहर निकालना शुरू किया। वहां पहुंचे रीवां मध्य प्रदेश के अभिषेक पांडे ने बताया कि हादसे के बाद कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था। यूनिट से भागकर बाहर बेहोशी की हालत में गिरे कई मजदूरों को एंबुलेंस तक पहुंचाया।
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सोनभद्र के जगदेव सिंह व फरीदपुर के राम सजीवन गौतम ने बताया कि उस समय का भयावह मंजर देखकर कोई वहां नहीं जा रहा था, लेकिन करुण क्रंदन सुनकर वह खुद को रोक नहीं सके। घायल कई मजदूरों को बाहर निकाला। फरीदपुर के कमलेश कुमार एवं रामेंद्र कुमार पाल ने बताया कि धमाके की आवाज के बाद लोगों की चीख-पुकार सुनकर वह वहां पहुंचा तो मंजर देखकर कांप गया। खतरा होने के बावजूद यूनिट के निचले हिस्से में फंसे करीब 12 घायलों को बाहर निकाला। बिकई गांव के इरशाद अहमद ने चीख-पुकार के बीच घायलों को एंबुलेंस में बैठाकर अस्पताल तक पहुंचाया। हादसे की कहानी बयां करते समय सभी के चेहरे पर खौफ साफ-साफ झलक रहा था।
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