रायबरेली। योगी सरकार ने अपने बजट में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में जमीन के लिए 10 करोड़ रुपये दिए हैं।
गुरुवार को पेश बजट में धन की व्यवस्था होने के बाद करीब 52 एकड़ जमीन मिल जाएगी। हालांकि तीन गांवों के किसानों से सुलह-समझौते के आधार पर जमीन लेने के लिए जिला प्रशासन प्रयास कर रहा है।
शहर से सटे दरियापुर में एम्स की ओपीडी चल रही है। एम्स को पूरी तरह से संचालित कराने के लिए 52 एकड़ भूमि की और जरूरत है।
इसके लिए जिला प्रशासन दरियापुर, मधुपुरी आदि गांवों के किसानों से बात कर रहा है। आपसी सुलह समझौते के आधार पर जमीन के अधिग्रहण का प्रयास किया जा रहा है।
जिला प्रशासन को चार साल पहले ही करीब आठ करोड़ रुपये जमीन के लिए मिले थे, लेकिन प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण जमीन की व्यवस्था नहीं हो सकी थी।
गुरुवार को आए बजट में एम्स की जमीन के लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। सुलह समझौते के आधार पर जमीन अधिग्रहण के लिए अर्जन निकाय कमेटी के माध्यम से किसानों की जमीन लेने का प्रयास किया जा रहा है।
मामले में डीएम ने पूर्व में महानिदेशक (चिकित्सा व शिक्षा) को पत्र लिखकर अर्जन निकाय कमेठी के गठन का अनुरोध किया था। कमेटी के गठन का काम भी पूरा हो गया था, लेकिन बजट की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी थी।
2020 में पूरा होगा काम
एम्स में 1400 छात्रों की क्षमता के छात्रावास और एम्स के स्टाफ के लिए आवास बनाने के बाद 600 बेड के हॉस्पिटल (चिकित्सीय परिसर) का काम तेजी से चल रहा है। 278 करोड़ रुपये की लागत का काम एक निजी कंपनी करा रही है। यह काम वर्ष 2020 में पूरा कराना है, जिससे एम्स के संचालन को काम बेहतर ढंग से कराया जा सके।
इसी साल जुलाई से शुरू होगी एमबीबीएस की पढ़ाई
एम्स में एमबीबीएस की पढ़ाई जुलाई 2019 से शुरू होगी। पहले बैच में 50 छात्रों की पढ़ाई होगी। पीजीआई चंडीगढ़ की डीम्स रिसर्च सेंटर की टीम यहां इसके लिए कई बार आ भी चुकी है। ओपीडी के बाद पढ़ाई के लिए भवन के निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। आवासीय भवनों के निर्माण का काम पहले ही पूरा हो चुका है।
एम्स के लिए 52 एकड़ की जमीन की व्यवस्था के लिए प्रयास चल रहा है। इस संबंध में किसानों से कई चरणों में वार्ता हो चुकी है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कराकर जमीन की व्यवस्था कराई जाएगी। इसके लिए शासन से पहले ही निर्देश मिल चुके हैं।
संजय कुमार खत्री, जिलाधिकारी