रायबरेली। ऊंचाहार सीएचसी में 2008 में प्रसव के दौरान बच्चा बदलने के मामले की गुत्थी अब डीएनए रिपोर्ट सुलझाएगी।
इस मामले में वादी और प्रतिवादी पक्षों का डीएनए सैंपल ले लिया गया है और अब उस सैपल को विधिविज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा जाएगा। पुलिस का मानना है कि अब डीएनए रिपोर्ट ही बच्चे के असली वारिस के बारे में बताएगी।
ऊंचाहार थाने के एनटीपीसी चौकी इंचार्ज एवं विवेचक एमपी सिंह ने बताया कि ऊंचाहार क्षेत्र के पुरवारा निवासी लक्ष्मी नारायण मौर्य और गंगश्री निवासी अकबर अली ने अपनी पत्नियों को प्रसव के लिए ऊंचाहार सीएचसी में भर्ती कराया गया था।
इसमें लक्ष्मी नारायण की पत्नी ने मृत बच्चे को जन्म दिया था, जबकि अकबर अली की पत्नी ने जिंदे बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद दोनों परिवार घर चले गए थे। इसके बाद अकबर अली बच्चे को लेकर मुंबई चला गया था।
विवेचक ने बताया कि वर्ष 2012 में कोर्ट के आदेश पर लक्ष्मी नारायण ने अकबर अली, सीएचसी अधीक्षक, चिकित्सक, वार्ड ब्वाय समेत छह लोगों पर बच्चा बदलने की एफआईआर लिखाई थी, जिसकी जांच चल रही है।
विवेचक ने बताया कि कोर्ट ने डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया था। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी नारायण, उसकी पत्नी संतोष कुमारी और अकबर अली, उसकी पत्नी तबस्सुम बानो का जिला अस्पताल में डीएनए सैंपल लिया गया है। सैंपल को लखनऊ भेजा जाएगा। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि बच्चे का असली वारिस कौन है।