डीह (रायबरेली)। क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय, मऊ में शुक्रवार सुबह कीड़े मारने की दवा खाने के बाद 15 बच्चे बीमार हो गए। उनके पेट में दर्द शुरू हो गया। सूचना पर पहुंचे अभिभावकों ने विद्यालय में हंगामा शुरू कर दिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पहुंचकर बच्चों की जांच कर दवा दी। कुछ देर बाद बच्चे स्वस्थ्य हो गए। खंड शिक्षा अधिकारी ने लोगों को समझाकर मामला शांत कराया।
उच्च प्राथमिक विद्यालय, मऊ में शिक्षक ब्रजराज और अनुदेशक अशोक कुमार की मौजूदगी में आशा ने शुक्रवार को 158 बच्चों को पेट के कीड़े मारने की दवा दी। दवा खाने के कुछ देर बाद ही दीपांशी, शीलम, कंचन, राज, हिमांशी, रूबी, खुशबू, संजनी, अहम, दीपक, सचिन, प्रियांशी, धर्मेंद्र, हिमांशू, अमरेश ने पेट में दर्ज की बात बताई। शिक्षकों ने बीईओ सत्य प्रकाश और स्वास्थ्य विभाग को दी।
खबर पाकर बच्चों के अभिभावक स्कूल पहुंच गए और हंगामा करके लगे। पुलिस भी स्कूल पहुंच गई। डॉक्टर डीएन चौधरी और प्रदीप पांडेय की टीम ने स्कूल पहुंचकर बच्चों का चेकअप किया और दवा दी। बीईओ सत्य प्रकाश ने बताया कि बच्चों को कीड़े मारने की दवा खिलाई गई थी। कुछ बच्चों ने पेट में दर्द की शिकायत की। दवा खाने के कुछ देर बाद बच्चे ठीक हो गए।
7.10 लाख बच्चों को खिलाई पेट के कीड़े मारने की दवा
रायबरेली। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत शुक्रवार को बच्चों को दवा खिलाने के लिए अभियान चलाया गया। दिनभर में करीब 7.10 लाख बच्चों ने एल्बेंडाजॉल दवा खाई। शहर के बीएसएस स्कूल में सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह, स्कूल के निदेशक बीएल सिंह ने बच्चों को दवा खिलाकर अभियान की शुरुआत कराई। इस मौके जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना, जिला शहरी समन्वयक विनय पांडेय आदि मौजूद रहे। टीम ने केंद्रीय विद्यालय में भी पहुंचकर बच्चों को दवा खिलाई। इसके अलावा अन्य स्कूलों में भी आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर 19 साल से कम उम्र के बच्चों को दवा खिलाई।
दवा से कोई नुकसान नहीं, कुछ समस्या होने पर घबराएं नहीं
सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि पेट में संक्रमण या कीड़े होने पर एल्बेंडाजॉल दवा खाने के बाद पेट में दर्द या कुछ और समस्या हो सकती है, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ ही देर में यह समस्या खत्म हो जाती है। डीह के एक स्कूल में 15 बच्चों को समस्या हुई, लेकिन कुछ देर बाद बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ हो गए।