डलमऊ (रायबरेली)। ग्रामीणों को सौ दिन रोजगार दिलाने वाली मनरेगा का जिले में कोई पुरसाहाल नहीं है। प्रधान और अफसरों की सांठगांठ इस कदर बढ़ गई है कि जॉबकार्ड धारक रोजगार के लिए इधर-उधर भटक रहा है। वहीं कार्य के नाम पर लाखों रुपये वारे न्यारे किए जा रहे हैं। इसका ताजा खुलासा हाल ही में डलमऊ तहसील क्षेत्र के बलीपुर गांव में हुआ। टीएसी जांच रिपोर्ट में मामले का खुलासा होने के बाद पूर्व प्रधान, पंचायत सेक्रेटरी और तकनीकी सहायक से धन की रिकवरी कराने का आदेश दिया गया है। इससे अफसरों में हड़कंप मचा है। डलमऊ तहसील क्षेत्र के बलीपुर गांव में मनरेगा से संपर्क मार्ग और खड़ंजा का निर्माण कराया गया था। कार्य की गुणवत्ता पर वीरभान सिंह आदि ग्रामीणों ने डीएम से इसकी शिकायत की थी। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद इसकी टीएसी जांच कराई गई। इस दौरान पर्त दर पर्त खामियाें का खुलासा होता गया। जांच रिपोर्ट के बाद अफसर भी भौचक्के रह गए। टीएसी ने मामले में पूर्व प्रधान शिवबरन, पंचायत सेक्रेटरी उमाशंकर यादव और तकनीकी सहायक मनरेगा लक्ष्मीशंकर यादव को धांधली का मुख्य सूत्र बताया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला कार्यक्रम समन्वयक अधिकारी मनरेगा ने तीनों लोेगों से धन रिकवरी करने का आदेश जारी कर दिया। इसमें पूर्व प्रधान और पंचायत सेक्रेटरी से 68-68 हजार रुपये और तकनीकी सहायक मनरेगा से 19 हजार रुपये रिकवरी करने का निर्देश दिया। धांधली उजागर होने के साथ ही पूर्व प्रधान समेत आरोपियों में अफरातफरी मची है।