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चंद दिनों की सख्ती, फिर फेल हो जाता जेल का सिस्टम

लखनऊ ब्यूरो Updated Thu, 20 Jun 2019 01:04 AM IST
चंद दिनों की सख्ती, फिर फेल हो जाता जेल का सिस्टम
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रायबरेली। जेल की सुरक्षा न सिर्फ मजाक बन गई है। सुरक्षा में कोई चूक उजागर होने के बाद चंद दिनों तो सख्ती बरती जाती है, लेकिन इसके बाद सिस्टम पुराने ढर्रे पर आ जाता है।

जेल में वीडियो वायरल का यह कोई पहला मौका नहीं है। पिछले साल भी वीडियो वायरल हुआ था, जिसके लापरवाही की गूंज प्रदेश स्तर तक हुई थी। इस मामले को लेकर यूपी सरकार की तरफ से बड़ी कार्रवाई भी की गई थी, पर अफसर हैं कि लापरवाही सुधारने को तैयार नहीं।

25 नवंबर 2018 को जिला कारागार में असलहा-कारतूस के बीच शराब पी रहे कुछ बंदियों का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें बंद अपराधी जेल में सिगरेट का धुआं उड़ा रहे थे।

यही नहीं इस वीडियो में जेल में बंद अपराधी फोन पर अपने साथी को 10 हजार रुपये एक जेल अधिकारी को देने की बात कह रहे थे। इस मामले में तत्कालीन जेल अधीक्षक प्रमोद शुक्ला व जेलर के अलावा कई सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया था।

इसके बाद भी व्यवस्था पटरी पर नहीं आई। सात महीने बाद फिर बुधवार को वीडियो वायरल हुआ, जो दर्शाता है कि जेल के अंदर अफसर चाहे जितने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम के दावे करते हों, वह महज कागजों तक ही सीमित हैं।

मौैजूदा समय में जेल में करीब 800 बंदी बंद हैं। इसमें से करीब 30 शातिर किस्म के हैं, जिनके इशारे पर हर कार्य वहां पर आसानी से हो जाते हैं। एंड्रायड मोबाइल फोन जेल के अंदर तक पहुंच जाते हैं।

गांजा, सिगरेट तक आसानी से पहुंच जाती है। जेल ऐशोआराम का अड्ड बन गई है। ऐसे में जेल की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत है।

पिछले साल जिला कारागार में असलहा-कारतूस के बीच शराब पी रहे कुछ बंदियों का वीडियो वायरल होने के मामले में बंदी अंशु दीक्षित, सोहराब खान, दलसिंगार सिंह, अजीत चौबे के नाम सामने आए थे।

इन सबके खिलाफ सदर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। साथ ही इन बंदियों को दूसरे जनपदों की जेल में शिफ्ट कर दिया था। केस दर्ज करने के बाद इस मामले की जांच अब तक चल रही है।
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