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भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ी सीवर लाइन, अधर में लटक गया कार्य

लखनऊ ब्यूरो Updated Sat, 25 May 2019 12:47 AM IST
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सीवर लाइन, अधर में काम
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रायबरेली। शहर में 111 करोड़ रुपये से अमृत योजना के तहत बिछाई जा रही सीवर लाइन की जांच में भ्रष्टाचार का खेल उजागर होने के बाद यह कार्य अधर में लटकता नजर आ रहा है।

नगर पालिका की ओर से उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं दिया गया तो शासन की ओर से योजना के कार्य के लिए कोई अन्य बजट नहीं दिया जाएगा। नगर पालिका के अधिकारी की जांच में घालमेल उजागर होने के बाद उन्होंने प्रमाणपत्र देने से इंकार कर दिया है।

अफसर पहले हर स्तर की जांच करने की बात कह रहे हैं। गौरतलब है कि अमृत योजना के तहत शहर में 111 करोड़ रुपये से सीवर लाइन बिछाने और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य कराया शुरू कराया गया है।

कार्य कराने की जिम्मेदारी जलनिगम की कार्यदायी संस्था को दी गई है। कार्यदायी संस्था जलनिगम की ओर से ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है। कार्यदायी संस्था ने पालिका को पत्र लिखकर 14 करोड़ रुपये के कार्यों को कराने के बाद उपयोगिता प्रमाणपत्र मांगा है।

ऐसे में पालिका ने जांच कराने के बाद उपयोगिता प्रमाणपत्र देने की बात कही थी। अमृत योजना के तहत बिछाई जा रही सीवर लाइन के कार्य की मंगलवार को जांच कराई गई तो पाइप लाइनें मनमाने ढंग से बिछाने की बात सामने आई।

यह खेल उजागर होने के बाद पालिका की ओर से कार्य को रुकवा दिया गया है। पालिका और कार्यदायी संस्था के बीच इसको लेकर तकरार शुरू हो गई है। पालिका के अफसरों ने बिना जांच के उपयोगिता प्रमाणपत्र देने से इंकार कर दिया है।

शासन की ओर से जो धन अब तक 14 करोड़ रुपया दिया गया था, उसका कार्य करा दिया गया है। अन्य कार्य कराने के लिए बजट की जरूरत है। बिना पालिका के उपयोगिता प्रमाणपत्र मिले बजट जारी नहीं होगा।

ऐसे में माना जा रहा है कि ऐसे में यह कार्य अधर में लटक सकता है। एक साल का समय बीत गया है, लेकिन सीवर लाइन बिछाने का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है।

पालिका के अफसरों का दावा है कि अब तक महज 20 फीसदी का कार्य किया गया है, वहीं जलनिगम के अफसरों का दावा है कि अब तक 30 फीसदी का कार्य हो चुका है। कार्यदायी संस्था के ठेकेदार की ओर से मनमाने ढंग से कराए जा रहे कार्य से शहरवासियों में भी नाराजगी है।
इनसेट
नगर पालिका रायबरेली के ईओ बालमुकुंद मिश्रा ने कहा कि 14 करोड़ रुपये का कार्य कार्यदायी संस्था की ओर से कराया गया है। बिना जांच के उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं दिया जाएगा। इसके बिना सीवर लाइन का कार्य कराने के लिए अन्य कोई बजट नहीं मिलेगा।

सीवर लाइन का कार्य मानक के अनुरूप ही कराया जाएगा। इसमें किसी तरह मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। इस बारे में उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है।
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