राजीव गांधी ने 'ग्राम कांग्रेस' का सपना देखा था। इसके जरिए वे ग्रामीण भारत को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर मजबूत करना चाहते थे। अपने पिता के इसी सपने को पूरा करते हुए प्रियंका गांधी अब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को दोबारा खड़ा करना चाहती हैं। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संगठन को गांव, न्याय पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर मजबूत करने की गंभीर कोशिशें हो रही हैं। कांग्रेस की कोशिश है कि वह मतदाताओं में गैर-भाजपाई विचारधारा के लोगों को अपने साथ जोड़े और एक मजबूत विपक्ष बनकर खड़ी हो।
कांग्रेस के सर्वोच्च नेताओं से पार्टी के निचले स्तर तक के कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी कांग्रेस की बड़ी समस्या थी। इसका नतीजा होता था कि ऊपर लिए गए फैसले और नीतियां निचले स्तर तक नहीं पहुंचती थीं। मनमोहन सिंह सरकार ने अपने दस साल के शासनकाल में जनता के लिए काफी अच्छे काम किए। लेकिन इन योजनाओं को भाजपा की तरह निचले स्तर तक पहुंचाने का तंत्र गायब था।
प्रियंका गांधी के विशेष सलाहकार आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस इस बात को बखूबी समझ रही है कि गांव, पंचायत और ब्लॉक जैसे सबसे निचले स्तर पर मजबूत हुए बिना पार्टी मजबूत नहीं हो सकती। प्रियंका ने जब उत्तर प्रदेश संगठन का काम संभाला, तो उन्होंने सबसे पहले प्रदेश के हर जिले के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं-कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। यह समझने की कोशिश की कि पार्टी से किस स्तर पर चूक हो रही है और पार्टी किस तरह दुबारा अपनी जमीन वापस पा सकती है।
सबसे राय लेने के बाद ग्राम स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की रणनीति पर काम किया गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी ने लगातार दौरा किया, निचले स्तर पर बैठकें की और किसान महापंचायतों के जरिए लोगों को साधने की कोशिश की। मार्च महीने में अब यही कोशिशें पूर्वी उत्तर प्रदेश में की जाएंगी। इसका पंचायत चुनावों के साथ-साथ 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी लाभ मिलेगा।
कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि पार्टी के पास नेताओं की कमी नहीं है। उसके पास केंद्र में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी कई नेता मौजूद हैं। लेकिन उसके पास निचले स्तर पर कार्यकर्ता नहीं थे। इसका परिणाम यह होता था कि बड़े नेताओं के कार्यक्रम करने के बाद उसका फॉलो-अप नहीं होता था। कार्यक्रम के बाद संगठन का काम ठप हो जाता था।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव और पूर्वांचल जोन के प्रभारी विश्वविजय सिंह ने अमर उजाला को बताया कि प्रियंका गांधी के नेतृत्व में एक बड़ा बदलाव यह हुआ है कि प्रदेश के सर्वोच्च नेताओं का सबसे निचले स्तर तक के नेताओं से सीधा संपर्क स्थापित हुआ है। पहले ऊपर के स्तर पर लिए गए निर्णय निचले स्तर तक नहीं पहुंचते थे, लेकिन अब प्रदेश के सर्वोच्च नेताओं का न्याय पंचायत स्तर तक के कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क हो रहा है। पार्टी के नेता लगातार व्हाट्सअप के जरिए निचले स्तर तक जुड़े हुए हैं।
विश्वविजय सिंह ने बताया कि न्याय पंचायत स्तर तक के अध्यक्षों और उनकी टीमों का गठन किया जा चुका है। निचले स्तर तक के संगठन में समाज के हर तबके के लोगों को जोड़ा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेताओं को अपने-अपने प्रभार वाले जिलों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इनमें से किसी एक जिले में नेताओं को तीन फरवरी से 25 फरवरी तक रात्रि प्रवास भी करना था, जिससे निचले स्तर तक के लोगों का संदेश ऊपर तक पहुंच सके और ऊपर के संदेश को निम्नतम स्तर तक पहुंचाया जा सके।
इसका बेहद सकारात्मक परिणाम मिल रहा है। ब्लॉक स्तर तक की बैठकों में बीस से 25 लोगों का जमावड़ा हो रहा है। हर विधानसभा स्तर पर किसान रैली निकाली जा रही है और किसी भी रैली में दो-चार सौ से कम लोगों की संख्या नहीं थी। इससे पार्टी के निचले स्तर पर मजबूत होने का संकेत मिलता है।
प्रियंका ने पद को सीधे तौर पर जिम्मेदारी और प्रदर्शन से जोड़ दिया है। जो नेता अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें बदलकर दूसरे कार्यकर्ताओं को अवसर दिया जा रहा है। इसी क्रम में दो दिन पहले अचानक देवरिया के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सैंठवार और कानपुर ग्रामीण की जिलाध्यक्ष ऊषारानी कोरी को बदल दिया गया। यानी प्रियंका ने साफ कर दिया है कि पार्टी में पद उन्हीं को मिलेगा जो प्रदर्शन कर सकेंगे। उनकी इस सोच से पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। पार्टी को उम्मीद है कि न्याय पंचायत स्तर के चुनावों में इसका सकारात्मक परिणाम दिखाई पड़ेगा।