अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। पुरुष प्रधान समाज में असुरक्षा से घिरीं महिलाएं खुद की शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार को लेकर फिक्रमंद नजर आ रही हैं। जिले की महिलाओं ने हर क्षेत्र में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। हर क्षेत्र में खुद को साबित किया है। वह अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 789 महिलाओं ने मुखिया बनकर यह साबित कर दिया है कि वह कहीं किसी से कमजोर नहीं हैं। जिले की कुछ ऐसी महिलाओं की उपलब्धियों पर एक नजर।
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आईएएस बनकर माधवी ने रचा इतिहास
लालगंज तहसील के इटौरी गांव निवासी अनिल कुमार मिश्र की बेटी माधवी मिश्रा ने पिछले वर्ष आईएएस बन नया इतिहास लिख दिया। उनसे पहले जिले की एक-दो महिलाओं को ही यह उपलब्धी हासिल हो सकी थी। माधवी वर्तमान में मसूरी में ट्रेनिंग कर रही हैं। उन्हें झारखंड कैडर मिला हुआ है। दो महीने के बाद मिलने वाली तैनाती के को लेकर वह पूरी तरह तैयार हैं।
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पहले डिप्टी एसपी, अब असिस्टेंट कमिशभनर बनी क्षमा
माधवी मिश्रा की बड़ी बहन क्षमा मिश्रा का चयन 2014 की परीक्षा में डिप्टी एसपी के पद पर चयन हुआ था। वर्तमान में मुरादाबाद में ट्रेनिंग ले रही क्षमा का चयन पीसीएस 2015 की परीक्षा में असिस्टेंट कमिश्नर पद पर हो गया। दो-दो बार पीसीएस की परीक्षा निकालने वाली क्षमा की इच्छा डिप्टी कलेक्टर बनने की है। क्षमा अभी हिम्मत नहीं हारी हैं, बल्कि पढ़ाई के बल पर यह सपना साकार करने का संकल्प लिया है।
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मोना ने सर्वश्रेष्ठ महिला विधायक का हासिल किया खिताब
जिले के रामपुरसंग्रामगढ़ की तीन बार ब्लाक प्रमुख रह चुकीं आराधना मिश्रा उर्फ मोना ने रामपुरखास से ही पहली बार महिला विधायक बनने का गौरव भी हासिल किया। राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा अपने पिता के पदचिह्नों पर चलकर राजनीतिक क्षेत्र में महारथ हासिल कर रही हैं। पहली बार विधानसभा पहुंचते के बावजूद सदन के अंदर अपनी आवाज बुलंद करने से वह कभी भी पीछे नहीं रहती हैं। चार मार्च को विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला विधायक के खिताब से नवाजा।
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रंग लाया शिक्षामित्रों के लिए रीना का संघर्ष
शिक्षामित्रों को अध्यापक बनाने के लिए संघर्ष करने वाली आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष रीना सिंह ने अपनी नई पहचान बनाई है। जिले के 3800 शिक्षामित्रों की अगुवाई करने वाली रीना सिंह ने बेल्हा से दिल्ली तक लड़ाई लड़कर शिक्षामित्रों को शिक्षक का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई। दूसरे चरण के समायोजित शिक्षामित्रों को नियुक्ति पत्र देने में आनाकानी करने वाले बीएसए को आधी रात को नियुक्ति पत्र बांटने के लिए मजबूर कर दिया। 01 मई 2015 को रात डेढ़ बजे नियुक्ति पत्र मिलने के बाद ही बीएसए कार्यालय से धरना-प्रदर्शन समाप्त किया।
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महिलाओं को निरोग रखने का उठाया बीड़ा
महिलाओं को निरोग रखने का बीड़ा उठानेे वाली पतंजलि योग समिति की सक्रिय महिला कार्यकर्ता श्रद्धा सिंह शहर में योग की कक्षाएं चलाकर महिलाओं को स्वस्थ रहने के टिप्स दे रही हैं। बाबा रामदेव के योग कक्षाओं में सफलता का गुर सीखने वाली श्रद्धा सिंह योग की विशेष जानकार हैं। वह अपनी पकड़ ग्रामीण महिलाओं के बीच भी बना रही हैं। इससे समाज की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा ले रही हैं।