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Pratapgarh News: बाग में लगे बाड़ के करंट की चपेट में आने से महिला की मौत, हंगामा

Wed, 03 Jul 2024 03:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
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कंधई थाना क्षेत्र के ताला में मंगलवार की सुबह आम की बाग के बाड़ में लगे करंट की चपेट में आने से निशा देवी की मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने बाग मालिक के घर के सामने एंबुलेंस में ही शव रखकर हंगामा किया। पुलिस के काफी समझाने पर परिजन शव लेकर घर चले गए। करीब दो घंटे बाद ताला बाजार की ओर आवागमन बहाल हो सका।
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ताला के मौर्य बस्ती की रहने वाली 51 वर्षीय निशा देवी मंगलवार की सुबह घर के करीब आम के बाग के किनारे नंगे पैर घूम रही थीं। हल्की बारिश के चलते जमीन में नमी थी। इस बीच आम की बाग की सुरक्षा के लिए लगाए गए कंटीले तारों के बाड़ में आ रहे करंट की चपेट में आने से निशा की मौत हो गई। यह देख परिजन रोने बिलखने लगे। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस छानबीन के बाद आवश्यक कार्रवाई में जुट गई। इधर शाम को पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर घर जाते समय बाग मालिक अजीत प्रताप सिंह व काम करने वाले अनवर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए शव रोककर हंगामा करने लगे। पुलिस उन्हें समझाने का प्रयास करती रही लेकिन वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए। बवाल की आशंका को देखते हुए कोहड़ौर व कंधई थानाध्यक्ष भी मौके पर पहुंचे। इस मामले में मृतका की बेटी रोशनी की तहरीर पर पुलिस ने बीएनएस के तहत 105 की धारा में अजीत प्रताप सिंह व अनवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। करीब दो घंटे बाद थानाध्यक्ष ने दस लाख रुपये आर्थिक मदद, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी के साथ ही नामजद एक आरोपी को हिरासत में लेने की जानकारी दी। जिसके बाद परिजन शव लेकर घर चले गए। तब जाकर पुलिस ने राहत की सांस ली। थानाध्यक्ष अवन कुमार दीक्षित ने बताया कि नामजद आरोपी अनवर को हिरासत में लिया गया है। परिवार के सदस्य बुधवार को आएंगे। जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार होगा। तनाव को देखते हुए पुलिसकर्मी तैनात हैं।

बेटे को कुछ बनाने का सपना नहीं हुआ पूरा
मृतका निशा की दो बेटी रेखा व रोशनी हैं। जिनकी शादी हो चुकी है। सबसे छोटे बेटे रंजीत मौर्य को वह कुछ बनाने का सपना देखती थी। मगर उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका।
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इनसेट
ये बताएं साहब 20 रुपये की सब्जी बचाने के लिए तार में क्यों दौड़ाया करंट
बाग मालिक अजीत प्रताप सिंह की कोठी के सामने शव रखकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण उस समय भड़क उठे, जब पुलिस उन पर शव उठाने का दबाव बना रही थी। ग्रामीणों का कहना था कि क्या 20 रुपये की सब्जी बचाने के लिए कंटीले तार में करंट उतारकर दूसरों की जान लेना जरूरी है। इसका कोई जवाब नहीं दे पा रहा था। हालांकि घटना के बाद करंट के लिए दौड़ाया गया तार निकाल लिया गया था।

पहले भी लोग आए थे करंट की चपेट में, विरोध पर भी नहीं माने
ताला में अजीत प्रताप सिंह की कोट है। बाग में मवेशी व दूसरे लोगों से नुकसान को बचाने के लिए कंटीले तार का बाड़ लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार 12 जून मृतका के परिवार की अंजू मौर्य करंट की चपेट में आई थी। देवर रामजी मौर्य व भतीजा पवन मौर्य भी पहले करंट का झटका खा चुके थे। पड़ोस की रहने वाली अर्चना भी बाल-बाल बची थी। आठ मवेशियों की करंट की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। विरोध करने पर भी लोग करंट नहीं हटाए।
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