सोमवार की शाम तेज हवाओं संग बारिश से खेतों में पड़ी गेहूं की फसल उड़ने के साथ ही भीग गई। मड़ाई के लिए खेतों में तैयार बोझ बारिश से नम हो गए। मौसम का रुख देख किसानों की सांसें अटक गईं।
हालांकि थोड़ी ही देर में हवाओं की चाल धीमी पड़ने से किसानों ने राहत की सांस ली। मंगलवार को भोर में ही फसल को सुरक्षित करने के लिए किसान खेतों में पहुंच गए। फसल को बचाने के लिए दिनभर पसीना बहाया। नुकसान की परवाह किए बगैर किसान दिनभर मड़ाई का काम निपटाने में लगे रहे।
लॉकडाउन के दौरान गेहूं की फसल की मड़ाई को लेकर किसानों को छूट दी गई है। मगर कार्रवाई के डर के चलते लोगों ने काफी देर से मड़ाई का कार्य शुरू किया। इसके चलते इस बार गेहूं की मड़ाई में काफी विलंब हो गया।
14 अप्रैल के बाद मड़ाई के कार्य में तेजी आई। अब तक किसानों ने 75 प्रतिशत मड़ाई का कार्य पूर्ण कर लिया है। मगर अभी भी रानीगंज, पट्टी, लालगंज, कुंडा व सदर क्षेत्र के किसानों की 25 प्रतिशत फसल खेत में है। आसमान में बादलों की उमड़-घुमड़ देख किसानों को फसल की चिंता सता रही है। ऐसे में मड़ाई का काम दिन-रात चल रहा है।
सोमवार को कई इलाकों में अचानक तेज हवाओं संग बारिश शुरू हो गई। इससे किसान परेशान हो उठे। जगह-जगह काटकर रखी गई फसल उड़ गई। बारिश से बोझ नम पड़ गए। थोड़ी देर बाद बारिश व हवाओं की रफ्तार थमने से किसानों ने राहत की सांस ली। मंगलवार को भोर में ही रानीगंज के गौरा, गाजी का बाग, सुल्तानपुर, जामतली, कोयम सहित कई गांवों में बोझ बनाने व मड़ाई करने में किसान जुटे रहे।
यही हाल सदर के भुपियामऊ, कोहड़ा, सराय बहेलिया आदि गांवों में भी रहा। किसान फसल की मड़ाई में जुटे रहे। खेत से खलिहान तक आपाधापी की स्थिति रही। जिला कृषि अधिकारी डा. अश्वनी सिंह ने बताया कि फसल के नुकसान की अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। जिले में लगभग 80 प्रतिशत से अधिक मड़ाई का कार्य हो चुका है।