छात्रों को 2014 सदैव कुरेदता रहेगा। यह वर्ष ऐसा बीता कि वे वजीफे का इंतजार ही करते रह गए। अभिभावकों की मानें तो ऐसा पहली बार हुआ है कि कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों को वजीफा देने के लिए सरकार की झोली खाली हो गई। दशमोत्तर कक्षाओं के सवा लाख परीक्षार्थी आनलाइन आवेदन करने के बाद भी अभी पशोपेश में हैं की वजीफा मिलेगा भी या नहीं। सरकारी, गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं में कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों को वजीफा दिया जाता था। कक्षा एक से पांच तक पढ़ने वाले बच्चों को तीन रुपये और कक्षा छह से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों को 480 रुपये प्रति छात्र की दर से वजीफा की राशि निश्चित थी। महंगाई के दौर में आम लोगों को भले ही यह धनराशि कम लग रही हो, मगर बच्चों की पढ़ाई में काफी मददगार साबित होती थी। गरीब परिवारों के बच्चे सर्दी से बचने के लिए स्वेटर खरीदते थे, वहीं सामान्य परिवार के बच्चे पेन और कॉपी खरीदते थे।
बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर गौर करें, तो चालू शिक्षासत्र में कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 7,26,698 है। सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले यह बच्चे जुलाई माह से ही वजीफा उस पल का इंतजार करते थे, जिस दिन उन्हें वजीफा की धनराशि मिलती थी। दिन के साथ माह बीता जब छात्रवृत्ति नहीं मिली तो अभिभावकों ने गुरुजी से खोजबीन करनी प्रारंभ कर दी। नवंबर माह में अधिकारियों ने इस बात का खुलासा किया कि चालू वित्तीय वर्ष में पढ़ने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी। इससे बच्चों के साथ ही अभिभावक भी मायूस हुए। दशमोत्तर (कक्षा नौ से परास्तातक) के छात्र-छात्राओं ने वजीफा के लिए आनलाइन फार्म भरा है। इनकी संख्या महज 1,21,583 है। आलम यह रहा कि अधिकांश बच्चों ने सरकार की बेरुखी देखकर आवेदन ही नहीं किया है। आनलाइन आवेदन करने वाले बच्चों को भी छात्रवृत्ति मिलेगी या नहीं, अधिकारी और बच्चे अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।