मैली गंगा में हम कब तक पाप धोते रहेेंगे। हमें गंगा मां की सफाई करके अपने पुत्र होने का कर्तव्य निभाना चाहिए। यह बातें सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाकर सिंह ने कहीं। उन्होंने कहा कि तराई मेें किसानों द्वारा गंगा की जमीन में होने वाली रासायनिक खेती नहीं होनी चाहिए। पम्पिंग सेटों से जलदोहन, चिताओं का कचरा, कछुओं का शिकार, मंदिरों की सफाई के बाद का कचरा, मूर्तिविसर्जन गंगा को मैली करने में लगा है। इसके चलते हमें लोगों को जागरूक करने के साथ ही स्वयं भी जागरूक होना होगा। इस दौरान उनके साथ दर्जनों लोगों ने करेंटी घाट की सफाई की। साथ ही मांग की कि सरकार जो दाह संस्कार यार्ड बना रही है वह गंगा से थोड़ी दूर पर बने जिससे बरसात में उसके बहने का खतरा न रहे। इस दौरान उनके साथ भारी संख्या में युवा मौजूद रहे। युवाओं ने भी मां गंगा की सफाई के लिए लोगों का जागरूक करने के लिए अपने संकल्प को दोहराया।