जिले की विकास योजना को अमली जामा पहनाने वाले विभाग की गाड़ी पटरी पर नहीं है। जरूरी नहीं कि सुबह दस बजे अधिकारी और कर्मचारी अपनी कुर्सी पर मिल जाएं। बृहस्पतिवार कई फरियादी एक से डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद लौट गए।
सीडीओ डॉ. दिव्या मिश्रा सुबह 10 बजे कार्यालय में बैठ गई थीं। लेकिन अन्य कार्यालय में बाबुओं के आने का क्रम करीब 11 बजे तक चलता रहा। इनमें कुछ ऐसे भी थे, जिन पर काम में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई भी की जा चुकी है।
डीपीओ ज्योति शाक्य सुबह के करीब 11 बजे तक कार्यालय नहीं पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह पोषण अभियान की जांच करने क्षेत्र में निकली थीं। देर से पहुंचे जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी आशीष द्विवेदी ने भी अपनी व्यस्तता बताई। बोले कि प्रयागराज से डिप्टी डायरेक्टर आए थे। उनके साथ क्षेत्र भ्रमण पर निकले थे। उनके पास अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का भी चार्ज है। डीपीआरओ की कुर्सी भी सुबह 11.10 तक खाली रही। उन्होंने बताया कि वह अवकाश पर हैं ।
अधिकारियों को समय से कार्यालय पहुंचने का निर्देश दिया गया है। देर से पहुंचने वाले अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। सही कारण न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. दिव्या मिश्रा, सीडीओ
इनका कहना है
- छात्रवृत्ति आवेदन से संबंधित जानकारी के लिए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग मेें सुबह 10 बजे पहुंचा। करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बाद घर लौट गया। अधिकारियों के कक्ष के बाहर जनता से मिलने का समय 10 बजे लिखा है लेकिन उनके समय से न बैठने पर परेशानी होती है। लोग जरूरी काम छोड़कर कार्यालय का चक्कर लगाते हैं।
- अंबुज कुमार, रानीगंज।
- गांव में दो माह से हैंडपंप खराब है। प्रधान से लेकर पंचायत सचिव तक शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे डीपीआरओ कार्यालय पहुंचा लेकिन कोई अधिकारी नहीं मिला। गेट पर बैठे चपरासी ने शुक्रवार को आने की बात कहकर वापस कर दिया।
-अश्वनी पाल, उड़ैयाडीह
डीएम ने एसडीएम सदर से मांगा स्पष्टीकरण
दफ्तर-दफ्तर पड़ताल के तहत सदर तहसील की खबर प्रकाशित होने के बाद डीएम शिव सहाय अवस्थी ने बृहस्पतिवार को एसडीएम सदर नैंसी सिंह से कार्यालय देरी से पहुंचने का स्पष्टीकरण मांगा।
उन्होंने बताया कि वह 23 सितंबर को शहरी क्षेत्रों में स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों और संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण करने निकली थीं। तहसील कार्यालय पहुंचकर जनता दरबार और न्यायालय का कार्य निपटाया। डीएम को भेजे जवाब में कहा कि अप्रैल माह की तैनाती के बाद से अब तक 3500 से करीब जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लंबित पत्रावलियों का निस्तारण कर चुकी हैं। प्रतिदिन न्यायालय में प्रस्तुत होने वाले जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के मामलों का निस्तारण भी किया जाता है।