सदर ब्लाॅक में तैनात रहे ग्राम पंचायत अधिकारी ने बेटे के नाम फर्म बनाकर बगैर विकास कार्य कराए ही चार करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। अफसरों की जांच में मामला सच निकलने पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। आश्चर्य की बात तो यह रही कि मां बेल्हा देवी की सीढ़ी बनवाने के लिए दो बार में लाखों रुपये निकाले गए।
वर्तमान में संडवा चंद्रिका विकास खंड के एडीओ पंचायत पद पर तैनात उमेश द्विवेदी ने सदर ब्लाॅक में तैनाती के दौरान अपने बेटे प्रतीक इंटरप्राइजेज के नाम लगभग चार करोड़ रुपये का भुगतान किया है। अफसरों की जांच रिपोर्ट से इस घपले का खुलासा हुआ है कि अधिकांश कार्य धरातल पर नहीं है, मगर निर्माण कार्य पूरा होना दिखाकर फर्म के नाम भुगतान कर लिया गया है।
दहिलामऊ ग्राम पंचायत में मां बेल्हा देवी की सीढियों के निर्माण के नाम पर एक बार 21,48,479 और दूसरी बार में 18,88,256 रुपये का भुगतान किया गया है। अफसरों के अनुसार सीढि़यों का निर्माण दूसरी योजना में किया गया है। चिलबिला में नाला ढक्कन रखने के नाम पर 13,11,622 रुपये तीन बार में निकाले गए हैं।
साथ ही चकवनतोड़, ईशीपुर, सिपाहमहेरी, गोड़े, गड़ईचकदेइया और भंगवा ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण के नाम पर हर ग्राम पंचायत से 7,84,000 रुपये निकाल लिए गए हैं। इसकी जानकारी होने पर डीएम ने टीम गठित कर जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। जांच में खुलासा हुआ कि अधिकांश विकास कार्य बिना पूरा कराए ही भुगतान कर लिया गया है।
अफसरों ने एडीओ पंचायत के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शासन को पत्र लिखा है। उपनिदेशक पंचायतीराज जयदीप त्रिपाठी ने बताया कि तत्कालीन वीडीओ के खिलाफ जांच पूरी हो गई है। जांच में घपला उजागर होने पर कार्रवाई के लिए निदेशक पंचायतीराज को पत्र लिखा गया है।