मेडिकल कॉलेज में 20 जनवरी से मरीजों के सीटी स्कैन की सुविधा मिलने लगेगी। कॉलेज में इसकी तैयारी अंतिम दौर में है। हर दिन निजी केंद्रों पर 25 से 30 मरीज सीटी स्कैन कराने जाते हैं। निजी केद्रों के संचालक मरीजों से तीन हजार रुपये तक शुल्क लेते हैं। मुफ्त परामर्श के बाद यह रकम मरीजों की जेब पर भारी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ रहती है। आर्थों, मेडिसिन, सर्जरी, ईएनटी सहित अन्य विभागों में मरीजों की लंबी कतार लगती है। डॉक्टर जरूरत के मुताबिक मरीजों को सीटी स्कैन और एक्स-रे कराते हैं। मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन की व्यवस्था न होने के कारण मरीजों को निजी केंद्रों पर जाना पड़ता हैं।
इसका फायदा चिकित्सक के साथ निजी केंद्रों के सीटी स्कैन संचालक उठाते हैं। मरीजों से ढाई से तीन हजार रुपये जांच के नाम पर लिए जा रहे हैं। अब मरीजों को जल्द ही इससे छुटकारा मिल जाएगा।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सौभाग्य प्रकाश ने बताया कि सीटी स्कैन मशीन स्थापित हो गई है। मशील इंस्टॉल करने के लिए लखनऊ से इंजीनियर बुलाए गए हैं। इसके बाद लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाएगा। प्रयास रहेगा कि सीटी स्कैन जांच 15 दिन के अंदर शुरू कर दी जाए। 20 जनवरी तक सीटी स्कैन सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
128 स्लाइस की मशीन से छोटी गांठ का भी चल जाएगा पता
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने करीब डेढ़ करोड़ की लागत से इस्राइल से अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीन मंगाई है। जिसकी क्षमता 128 स्लाइस की है। इससे बारीक से बारीक जांच होगी और छोटी गांठ, नस में दिक्कत का भी पता चल सकेगा।
मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन मशीन स्थापित हो गई है। इंजीनियर बुलाए गए हैं। जांच में कितना शुल्क लगेगा यह शासन तय करेगा। जांच के पहले लाइसेंस लिया जाएगा, फिर सेवा शुरू की जाएगी। लाइसेंस के लिए आवेदन भी कर दिया गया है।
- डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य