फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रतापगढ़ : मेडिकल कॉलेज में दवाओं का टोटा, मरीज परेशान,विभागीय अधिकारी अंजान

Tue, 08 Nov 2022 12:39 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़

सार

डॉक्टर सोने लाल पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में दवाओं का टोटा है। मरीजों को गैस, एंटीबायोटिक, शूगर, दर्द निवारक जेल सहित कई दवाओं के लिए मेडिकल स्टोर का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
antibiotics tablets
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

डॉक्टर सोने लाल पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में दवाओं का टोटा है। मरीजों को गैस, एंटीबायोटिक, शूगर, दर्द निवारक जेल सहित कई दवाओं के लिए मेडिकल स्टोर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। दवाएं न मिलने से मरीजों को परेशानी हैं। विभागीय अधिकारी इसे लेकर संजीदा नहीं हैं। डॉ. सोने लाल पटेल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के निर्माण के बाद जिले के लोगों को सस्ते व बेहतर इलाज की आस जगी थी।

विज्ञापन


इस बात की भी खुशी थी कि बेहतर इलाज के लिए अब उन्हें प्रयागराज अथवा लखनऊ तक की दौड़ भाग नहीं करना होगा। अस्पताल में ही सस्ता इलाज मिल सकेगा। लेकिन विभागीय जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है और मरीजों को इलाज के लिए अब भी मंहगी दवाओं का ही सहारा लेना पड़ रहा है।

राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के डॉक्टर मरीजों को ओपीडी में बाहर के मेडिकल स्टोरों की दवाएं लिख रहे हैं। मरीजों के अनुसार कुछ चिकित्सक दवा लाकर दिखाने तक की बात करते हैं। ऐसा तब है, जब औषधि भंडार में 200 से अधिक दवाओं के होने का दावा किया जा रहा है। मरीजों की मानें तो हर पांच दवाओं में दो दवाएं बाहर के मेडिकल स्टोर की लिखी जाती हैं। वहीं मरीजों द्वारा दवा न लेने की बात कहने पर सरकारी अस्पताल की लिखी जाती है। जबकि उसमें से अधिकांश दवा सरकारी अस्पताल के काउंटर पर मरीजों को नहीं मिल पा रही है।


चिकित्सकों के अनुसार ठंड के दिनों में चर्म रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ती है। सभी मरीजों को सरकारी अस्पताल की दवा लिखकर काउंटर पर भेजा जा रहा है। काउंटर पर पहुंचने पर पता चलता है कि दाद, खाज खुजली तक की दवा नहीं है। इसके साथ ही डाइक्लोजेल, बच्चों के लिए एंटीबायोटिक दवा, शूगर की दवा, चोट लगने के बाद सूजन की दवा भी उपलब्ध नहीं है।
विज्ञापन

अस्पताल में कौन-कौन सी दवा, चिकित्सकों को भी नहीं है पता
राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के दवा काउंटर पर कौन-कौन सी दवा है इसके बारे में चिकित्सकों को भी जानकारी नहीं है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में आने वाली सभी दवा को चिकित्सक याद कर रखे हुए हैं। डॉक्टर एक रुपये के पर्चे पर दवा लिखकर मरीजों को सरकारी अस्पताल के काउंटर से मुफ्त में लेने के लिए भेज देते हैं। मरीज लाइन में लगकर दवा काउंटर तक पहुंचता है। यहां पता चलता है कि डॉक्टर जो दवा लिखे हैं वह खत्म हो गई है। काउंटर पर बैठे ट्रेनी फार्मासिस्ट मरीजों को बाजार से दवा खरीदने के लिए भेज देते हैं।
 

इक्सपायर होने वाली है बीटाडीन जेल
राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में मरीजों को मुफ्त में वितरण के लिए आई बीटाडीन जेल दो माह में इक्सपायर हो जाएगा। ऐसे में इस दवा को पहले से ही हटाकर रख दिया गया है। हालांकि कर्मचारी इसके बारे में कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
 

जरूरी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं। कुछ ही दवाएं ऐसी हैं, जो नहीं है। मगर उसके एवज में कुछ दूसरी दवाएं दी जाती हैं। यदि फार्मासिस्ट मरीजों को दवाएं नहीं दे रहे हैं तो यह गलत है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सुरेश सिंह, सीएमएस राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें