लखनऊ- वाराणसी राजमार्ग पर 55 किमी के सफर में नौ खतरनाक प्वाइंट
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। लखनऊ- वाराणसी राजमार्ग पर जिले के 55 किलोमीटर के सफर में दुर्घटना बहुल कुल नौ स्थान हैं। ऐसे खतरनाक स्थानों के आसपास मुसाफिरों को सचेत करने के लिए संकेतक दूर तक नहीं दिखते। बारिश की वजह से पेड़ की डाल व पत्तियों के बीच कुछ संकेतक नजर नहीं आ रहे हैं। इसी हाईवे पर बीते सोमवार को सड़क हादसे में 12 लोगों की मौत हुई है।
लखनऊ - वाराणसी राजमार्ग पर फतनपुर के जगनीपुर से लेकर लालगंज के रानीगंज कैथौला तक करीब 55 किमी के सफर में 9 दुर्घटना बहुल स्थान हैं। फतनपुर के जगनीपुर मोड़, गौरा मोड़, रामारुर ओवरब्रिज के पहले, गाजी की बाग, रानीगंज पावर हाऊस मोड़, पृथ्वीगंज छैवा पुल, कटरा मेदनीगंज, सुखपाल नगर सकरनी पुल, लीलापुर सई पुल, हंड़ौर मोड़, रानीगंज कैथौला बाजार से पहले भी अंधा मोड़ होने की वजह से वाहनों के ओवरटेकिंग के समय अधिकांश सड़क हादसे हो चुके हैं।
एनएचआई की ओर से सर्विस देकर हाईवे के दो लेन की डिवाइडर पेटिंग व मरम्मत तो समय पर कराई जाती है, लेकिन दुर्घटना बहुल क्षेत्र में खतरनाक स्थानों पर रेडियम युक्त संकेतक बोर्ड को समय पर चस्पा नहीं कराया जाता है। बीते तीन माह में रानीगंज पावर हाऊस, गौरा रामापुर ओवरब्रिज से पहले, पृथ्वीगंज छैयवा पुल से पहले, कटरा मेदनीगंज, लीलापुर मोड़, हंडौर, लालगंज तिना मोड़ के आसपास तीन माह में पति, पत्नी, मासूम बच्चे, बाइकसवार सहित 18 लोगों ने जान जा चुकी है। बीते सोमवार को इसी हाईवे पर हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई थी।
हाईवे पर हादसे से बचाव के लिए संकेतक बोर्ड लगाने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग व एनएचआई की है। उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर सभी सड़कों पर व्यवस्था में बदलाव कर संकेतक लगाने को कहा गया है।
दिलीप कुमार गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन