तीसरे दिन भी बेल्हा लोक महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का रंग जमा रहा। कभी बिरहा तो कभी ग्रुप नृत्य जैसी एक से बढ़ कर एक प्रस्तुति देख दर्शक गदगद रहे। चूंकि आखिरी दिन था लिहाजा भीड़ काफी थी। कलाकारों का अंदाज और उनमें छिपी प्रतिभा देख लोग ठहाकों के साथ तालियां पीटते रहे। भागदौड़ की झंझावत भरी जिंदगी से लोग खुशी के बीच तरोताजा नजर आए। देर रात तक कार्यक्रम चलता रहा।
शहर के जीआईसी परिसर में चल रहे महोत्सव में भूली-बिसरी कलाओं को भी देखने का मौका मिला। बताते चलें कि बिरहा की प्रस्तुति शुरू हुई तो शौकीन सुनने के लिए कान मंच की ओर लगा लिए। कलाकारों बिरहा गायन शुरू किया तो तारीफों की झड़ी लग गई। तालियां पीट कर कलाकारों के उत्साह को सभी ने बढ़ाया। छात्राओं ने नृत्य प्रस्तुत किया तो हर कोई उनकी कला को देख सराहने से नहीं रुक सका।
महिला की लोक कला भी खूब सराही गई। छात्रा ने एकल नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मनमोह लिया। कोलाहल भरे माहौल में उस वक्त खामोशी पसर गई जब छात्राओं ने गणेश वंदना और आरती शुरू की। हर कोई ने बड़ी आस्था के साथ आरती और वंदना में उन छात्राओं का साथ दिया। देखने वाली बात यह रही कि महोत्सव में लगे स्टालों पर खरीददारी के लिए भी लोग जमे रहे। स्टाल पर मौजूद सामग्रियों का मोलभाव, व उसकी गुणवत्ता और खासियत परखने का दौर भी देर रात तक चलता रहा।