जिले के 35 संस्कृत विद्यालयों की बदलेगी तस्वीर
- पहली बार शासन ने बजट देने का लिया फैसला, प्रबंधन को देनी होगी पांच प्रतिशत धनराशि
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। जिले के 35 अनुदानित संस्कृत विद्यालयों की तस्वीर जल्द ही बदली-बदली नजर आएगी। शासन ने पहली बार संस्कृत स्कूलों को सुविधा सम्पन्न बनाने के लिए बजट देने का फैसला लिया है। पुराने और जर्जर भवनों में चलने वाले स्कूलों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए न तो फर्नीचर हैं और न ही कोई सुविधा है।
ऐसा पहली बार है, जब संस्कृत स्कूलों को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए शासन ने बजट देने का फैसला लिया है। अधिकांश संस्कृत स्कूलों में आलम यह है कि विद्यार्थियों के बैठने के लिए न तो फर्नीचर है और न ही शौचालय। ऐसे में इन स्कूलों में शिक्षक तो आते हैं, मगर विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम हैं। इन स्कूलों को सुविधा संपन्न करने के पीछे शासन की मंशा है कि इंटर कॉलेजों की तरह संस्कृत स्कूलों में भी नियमित कक्षाओं का संचालन हो। संस्कृत स्कूलों को विकसित करने के लिए जो मसौदा तैयार किया है, उसके मुताबिक
निर्माण कार्य में 95 प्रतिशत धनराशि शासन और पांच प्रतिशत प्रबंधन देगा। जिससे स्कूलों में शिक्षण कक्ष, हॉल, बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालयों का निर्माण कराना है।
इनसेट-
मानदेय पर शिक्षकों की तैनाती के लिए निकाला गया है विज्ञापन
संस्कृत स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए विज्ञापन निकाला गया है। 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर तैनात होने वाले शिक्षक विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा का ज्ञान कराएंगे।
वर्जन-
जनपद में अनुदानित 35 संस्कृत विद्यालय हैं। शासन की इस पहल से विद्यालयों में बदलाव देखने को मिलेगा। अभी तक इन विद्यालयों को शासन से आर्थिक मदद नहीं मिलती थी।
- एसपी द्विवेदी, एडीआईओएस