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महिलाओं के लिए मिसाल बनी श्यामा

Sun, 01 Feb 2015 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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टूटी पटरी देखकर काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस को पलटने से बचाने के लिए लाल शाल ओढ़कर ट्रैक पर दौड़ने वाली श्यामा के जज्बे की हर तरफ प्रशंसा हो रही है। वह पहले भी कई की जान बचा चुकी है। कुछ समय पहले उसने अमृतसर जाते समय ट्रेन में एक महिला की डिलेवरी कराई थी। श्यामा देवी के पति श्रीराम पटेल ने भी एक साल पहले उसी स्थान पर ट्रेन हादसा होने से बचा लिया था।
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गरीबी व तंगी से जूझ रही श्यामा पटेल के जज्बे को हर कोई सैल्यूट कर रहा है। उसके इंसानियत भरे कार्य ने समाज की महिलाओं का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। बेटे राहुल के साथ खेत में काम करने गई श्यामा को तब पता नहीं था कि वह मौत की पटरी पर दौड़ रही काशी ट्रेन के यात्रियों की जान बचाने की वजह बनेगी। बकौल श्यामा टूटी पटरी पर ट्रेन आते उसके होश उड़ गए थे। उसके पास कुछ भी सोचने का वक्त नहंी था। दिमाग पर जोर डाला तो याद आया कि लाल रंग खतरे का निशान होता है। ट्रेन इससे रुक सकती है। उसकी नजर अपनी शाल पर गई। जिसको उसने ओढ़ रखा था। बस आव देखा न ताव शाल उतारकर पटरी पर खड़ी होकर लहराने लगी। उसकी इस हिम्मत ने ट्रेन हादसे को होने से बचा लिया। श्यामा देवी के इस कार्य को उसके गांव के साथ-साथ पूरा जिला सराह रहा है। बकौल श्यामा देवी वह गांव व समाज में इस तरह के कार्य करने के लिए महिलाओं को प्रेरित करने का काम करेगी। अपनी संतानों को भी इस तरह के कार्य करने की शिक्षा देती है।  गांव में हर किसी की मदद के लिए आगे आने वाली श्यामा देवी की इसी सोच ने आठ साल पहले एक महिला व उसके बच्चे की जान बचाई थी। अमृतसर जाते समय ट्रेन में एक महिला की डिलेवरी कराकर इंसानियत का परिचय दिया था।

श्यामा देवी के पति श्रीराम पटेल ने भी एक साल पहले उसी स्थान पर ट्रेन हादसा होने से बचा लिया था। श्रीराम ने बताया कि वह खेत से लौट रहा था। रेलवे लाइन पार करते समय उसकी नजर पटरी पर पड़ी तो होश उड़ गए। पटरी का ज्वाइंट खुला था। उसके नट बोल्ट भी नहीं थे। जलेबी गायब थी। उसने इसकी सूचना रेलकर्मियों को दी। तब जाकर हादसा टला था। ग्रामीणों ने इसकी पुष्टि की।
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श्यामा देवी का परिवार आर्थिक तंगी के बीच जीवन-यापन कर रहा है। श्यामा के पास खेत बाड़ी नहीं है। एक छोटे से खपरैलनुमा घर में वह अपने परिवार के साथ रहती है। श्यामा, पति श्रीराम तीनों बेटे अभयराज, शाहिल व राहुल दूसरे के खेतों पर जाकर मजदूरी करते हैं। तंगी के चलते पिता श्रीराम राहुल के अलावा दोनों बेटों को उच्च तालीम नहीं दिलवा सका। इंसानियत का जज्बा रखने वाली श्यामा व उसके परिवार की बेहतरी के लिए शासन-प्रशासन कुछ खास कर पाएगा। बीडीसी सदस्य बृजेश दुबे व ग्रामीण आपस में यही चर्चा करते रहे।
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