जमीयत उलमा-ए- हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि तकवा जिंदगी गुजारने वाला आखिरत में पैगंबर ए इस्लाम का करीबी होगा। इसके लिए सभी को मनचाही जिंदगी नहीं बल्कि रबचाही जिंदगी जीनी होगी।
विकास खंड के हरिहरपुर स्थित मदरसा नूरुल उलूम के दस्तारबंदी कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौलाना मदनी ने कहा, एक बार हजरत माज अनहू यमन जा रहे थे। पैगंबर ए इस्लाम नबी करीम ने फरमाया, ए माज आज की यह मुलाकात हो सके तो हमारी और आपकी आखरी होगी क्योंकि मुमकिन है यमन से आपकी वापसी मेरी कब्र के पास से हो। यह बात सुन हजरत माज रोने लगे।
फिर पूछा, आपसे कैसे मुलाकात होगी। तब फरमाया,आखिरत में मेरे सबसे करीब वह शख्स होगा जिसने दुनिया में मुत्तकी (संयमी) तथा तकवादार बन कर ज़िंदगी गुजारी हो। अल्लाव्ने कुरान में भी मुत्तकी तथा तकवा का जिक्र फरमाया है। मुत्तकी तथा तकवे का जिक्र करते हुए मौलाना ने कहा, जिस तरह आज लोग शेर तथा सांप से बचने के लिए मजबूत दीवार बनाते हैं।
इसी तरह तकवा वाली जिंदगी अपनाओ और अल्लाह के गुस्से के बीच ईमान तथा हम्दे सलेह की ऐसी दीवार बना लो, जो अल्लाह के गजब से बचा ले। मुत्तकी, परहेजगार तथा तकवादार बनकर जिंदगी गुजारने वाला जन्नती होता है।
दो दिनी जलसे में 137 बच्चों का कुरान मुकम्मल होने पर दस्तारबंदी की गई। बाद में मौलाना अरशद मदनी ने सभी के बेहतर मुस्तकबिल की दुआ मांगी। मौलाना मोहम्मद अशरफ तथा मुफ्ती मोहम्मद अफजल ने जलसे की शुरुआत की। मोहम्मद उजैस ने तिलावते कुरान पाक तथा हाफिज मोहम्मद शाग ने नात ए पाक पढ़ा।
कार्यक्रम में रानीगंज विधायक डॉ.आरके वर्मा, प्रबंधक तथा पूर्व विधायक हाजी अब्दुल सलाम उर्फ हाजी मुन्ना, नाजिम मौलाना अब्दुल हादी, मौलाना अकरम, जफरुल हसन, मौलाना अब्दुल्ला, मौलाना अब्दुल साफी, मौलाना अब्दुल यहया, मौलाना मुनीर, कारी मजलूम, मोहम्मद आरिफ कारी वहीद, हाफिज सलीम, मौलाना शमसाद, नजमुद्दीन, मौलाना इमरान मौजूद थे।
भीड़ देख खफा मौलाना अरशद
मदनी बीच रास्ते से लौटे शहर
दस्तारबंदी के सिलसिले में जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी को कार्यक्रम स्थल पर पांच बजे पहुंचना था। लेकिन, दो किलोमीटर पहले ही सड़क पर लोगों की भारी भीड़ से जाम लग गया। यह देख नाराज मौलाना अरशद मदनी बांसूपुर पहुंचे। वहां मगरिब की नमाज अदा की। फिर लोगों की कारगुजारी से नाराज होकर शहर चले गए। खबर मिलते ही आयोजक समेत अन्य उलमा उनके पास पहुंचे। रात तकरीबन पौने दस बजे मदरसा पहुंचकर तकरीर और बच्चों की दस्तारबंदी की।