राज्य सड़क परिचहन विभाग के अफसर रोडवेज बसों की आय बढ़ाने के लिए यात्रियों के जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। शासन की ओर से तय किमी और वर्ष पूरा कर खटारा हो चुकी बसों को सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। सफर के दौरान इन बसों से सफर करने वाले यात्री भगवान को याद करते है, ताकि सुरक्षित गंतव्य तक पहुंच जाए।
प्रतापगढ़ डिपो में रोडवेज की 62 बसें हैं। इनमें से 14 बसें शासन की ओर से तय 10 लाख किलोमीटर और दस साल चल तक सड़क पर फर्राटा भरने का नियम पूरा कर चुकी हैं। इसके बावजूद इन बसों को नीलाम के बजाए सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। इनमें से कई बसों के तो शीशे और सीट दोनों टूटी हुईं हैं। इससे यात्रियों को सफर के दौरान परेशान होना पड़ता है। बसें खटारा होने के कारण कभी और किसी भी समय हादसे का डर बना रहता है, लेकिन जिम्मेदार इससे पूरी तरह से अंजान बने हैं।
चुनाव के पहले होनी थी नीलामी
लोकसभा चुनाव के पहले डिपो की 14 बसों को नीलाम करने की तैयारी में अफसर जुटे थे। लोकसभा चुनाव में बसों की मांग होने पर नीलाम करना अफसर भूल गए। यात्रियों की मुसीबत और विभाग के आय को देखते हुए इन खटारा बसों का संचालन शुरू कर दिया गया। लोकसभा चुनाव के बाद नई सरकार बन गई, लेकिन विभाग के अफसर कंडम घोषित 14 बसों का नीलाम करना भूल गए।
दस लाख किमी और 10 दस सड़कों पर दौड़ चुकी हैं बसें
विभाग के एक अफसर ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि शासन का आदेश है कि दस लाख किमी या फिर दस साल चलने वाली बसों को नीलाम कर दिया जाए। लेकिन अफसर भूल गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रतापगढ़ डिपो से संचालित बस संख्या यूपी 72 टी 4112,4827,4828,4829,5358,5257,0120,3872,6212,6063,7746,4232,4778 और 6447 बस दस लाख किमी के साथ दस साल तक यात्रियों को अपनी सेवा दे चुकी हैं। अब सड़क पर चलने लायक नहीं हैं।
समय सीमा पूरा कर चुकी बसों की नीलामी के लिए पत्राचार किया गया है। जल्द ही नीलामी होगी। खटारा हो चुकी बसों को डिपो से बाहर निकालने पर रोक लगाई गई है।
एमके त्रिवेदी, आरएम, रोडवेज प्रयागराज।