मेडिकल कॉलेज से सटे अनम हॉस्पिटल में तीन दिन पहले प्रसूता की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम के हाथ महत्वपूर्ण तथ्य लगे हैं। सीसीटीवी फुटेज से प्रसूता की सर्जरी करने वाले डॉक्टर की पहचान कर ली गई है। वहीं जांच टीम में अस्पताल के कचरे के डिब्बे से एक ब्लड बैग भी बरामद किया है, लेकिन उस पर विवरण स्पष्ट नहीं हैं। माना जा रहा है कि यह वही ब्लड बैग है, जिसका खून प्रसूता को चढ़ाया गया था।
कंधई आसलपुर ईसनपुर निवासी खुशबू चौरसिया गर्भवती थीं। बीते शुक्रवार को परिजनों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज से सटे अनम अस्पताल में भर्ती कराया। खुशबू ने बेटे को जन्म दिया। देर रात चिकित्सकों ने 12 हजार रुपये लेकर अपने पास से खून चढ़ाया। खून चढ़ाते ही प्रसूता को दो बार खून की उल्टी हुई और उसकी मौत हो गई। आरोप है कि चिकित्सकों ने मृत अवस्था में खुशबू को प्रयागराज रेफर किया था।
प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल से लौटे परिजनों खुशबू के शव को अस्पताल गेट पास रखकर हंगामा किया था। शिकायत पर सीएमओ डाॅ. जीएम शुक्ल ने अस्पताल सील करा दिया था। मामले की जांच के लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. आजाद अहमद, स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी आरपी सिंह और अपर शोध अधिकारी आरजी चौधरी की टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए थे।
घटना के तीसरे दिन सोमवार को जांच टीम को अस्पताल का सीसीटीवी फुटेज मिला। अफसरों के मुताबिक फुटेज से खुशूब का ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक का पहचान हो गई है। वहीं टीम सदस्यों नने अस्पताल के अंदर कचरे के डिब्बे से एक ब्लड बैग बरामद किया है। माना जा रहा है कि इसी बैग में आया खून प्रसूता को चढ़ाया गया था।
डिप्टी सीएमओ डॉ. आजाद ने बताया कि अब यह पता लगाया जा रहा है कि खून किस ब्लड बैंक से आया था। किसने डोनेट किया था। ब्लड मैच किया गया था या बिना जांच किए मरीज को चढ़ा दिया गया। इसके बावजूद पीएम रिपोर्ट के बारे में अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
दूसरे ग्रुप का खून चढ़ाने की चर्चा
सीएमओ कार्यालय में प्रसूता को चढ़ाए गए खून के बारे में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जानकारी के मुताबिक प्रसूता का ब्लड ग्रुप एक पॉजिटिव था। जो बैग मिला है, उस पर ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव का स्टीकर लगा है। बैग के दोनों तरफ स्टीकर लगा होने और अंकन मिट जाने से ब्लड कहां से कब आया, इसका पता नहीं चल पा रहा है। एक बैग पर दो ग्रुप का स्टीकर भ्रम पैदा कर रहा है। इस बारे में टीम सदस्य जांच कर रहे हैं, लेकिन ज्यादा कुछ बताने से बच रहे हैं।
नीचे बिना लाइसेंस के अल्ट्रासाउंड केंद्र, ऊपर चल रहा था अस्पताल
अनम हॉस्टिपल के नाम से नीचे अल्ट्रासाउंड केंद्र का संचालन हो रहा है, जिसका नवीनीकरण नहीं हुआ है। जांच टीम की पड़ताल में यह बात सामने आई है। अनम हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों का यहीं अल्ट्रासाउंड कर रिपोर्ट दी जाती है। सीएमओ ही नहीं, स्वास्थ्य विभाग के अन्य अफसरों का आना-जाना इसी रास्ते से होता है, लेकिन इस पर किसी की नजर नहीं पड़ी और न ही लाइसेंस के मुद्दे पर कार्रवाई की गई।
प्रसूता की मौत के मामले में जांच दो से तीन दिन में पूरी हो जाएगी। हर पहलू को बारीकी से देखा जा रहा है। प्रसूता की मौत का राज जल्द खुल जाएगा। सीसीटीवी फुटेज में डॉक्टर का चेहरा पहचान लिया गया है, वह सर्जरी करते हुए दिख रहे हैं। कचरे के डिब्बे से मिला ब्लड बैग अहम सुराग बनेगा। पड़ताल चल रही है।
डॉ. जीएम शुक्ल, सीएमओ।