रोडवेज बसों की हालत खराब है। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। तमाम बसों में फर्स्ट एड बॉक्स और फायर किट नहीं रखा गया है। इससे लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जान हथेली पर रखकर सफर करना पड़ रहा है। प्रतापगढ़ डिपो में 52 बसें संचालित हो रही हैं। ज्यादातर बसों के पहियों के कई नट- बोल्ट ही गायब हैं। चलती बस के चक्के कब और कहां निकल जाएं, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं कई बसें ऐसी भी हैं जो चलते-चलते बीच मार्ग पर बंद हो जाती हैं। ऐसे में यात्रियों को धक्का देना पड़ता है। कई बसों के टॉयर खराब हो चुके हैं। खिड़कियों के शीश टूट गए हैं। इससे चलती बसों में यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आरोप है कि समस्या से अवगत कराने के बाद भी बसों की मरम्मत करवाने के लिए कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सफर के दौरान यात्रियों को मामूली चोट लग जाती है तो उसे अस्पताल का चक्कर काटना पड़ता है। किसी भी बस में इन दिनों फर्स्ट एक बॉक्स नहीं रखा गया है। आग को बुझाने के लिए ज्यादातर बसों में किट नहीं है। यात्रियों को जान हथेली पर रखकर सफर करना पड़ रहा है। एआरएम रवीन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि बसों की मरम्मत करवाने के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है। फर्स्ट एड बॉक्स की मांग की गई है।