फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pratapgarh News: होली पर रिफाइंड, सरसों तेल, वनस्पति घी की कीमतें गिरने से मिली सहूलियत

Sun, 05 Mar 2023 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना की मंदी के बाद किराना व्यापार में खाद्य वस्तुओं का दाम बढ़ने से बीते एक वर्ष से ग्राहकों को परेशानी थी। होली से पहले अचानक रिफाइंड आयल, सरसों का तेल व वनस्पति घी के दाम में भारी गिरावट होने से जहां होली में रसोईं को सहूलियत मिलेगी। वहीं दाल की दामों में अचानक बढ़ोत्तरी से लोगों की जेब भी ढीली होगी।
विज्ञापन

होली से पहले अचानक अलग-अलग ब्रांडेड कंपनी के रिफाइंड आयल, सरसों का तेल तथा वनस्पति घी के मूल्य में गिरावट देखी जा रही है। होली करीब होने से इनकी जरूरत बढ़ गई है। होली से पहले किराना व्यापार में खाद्य तेल के दाम में गिरावट की वजह से ग्राहंकों को सहूलियत मिलेगी।
शहर में गल्ला मंडी, चिलबिला, चौक, बाबागंज सहित प्रमुख किराना बाजार की दुकानों पर त्योहारी समय में खरीदारी के लिए ग्राहंकों की भीड़ जमा होने लगी है। चीनी, मैदा व सूजी के दाम में भी मामूली गिरावट है लेकिन अरहर की दाल के दाम बढ़े हैं।
विज्ञापन


दाम पर एक नजर
खाद्य तेल पहले का मूल्य अब
रिफाइंड आयल 160 148
डालडा 170 140
सरसों का तेल 180 160
सूजी 40 35
मैदा 40 35
चीनी 42 40
अरहर की दाल 110 120
.............................
कानपुर के बाजारों में बिक रहा समूह की महिलाओं का बनाया चिप्स, पापड़ व रंग
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। कृषि विज्ञान केंद्र पर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कालाकांकर ब्लाक के ऐंठू गांव के महिला स्वंय सहायता समूह की ओर से रंग, अबीर, गुलाल, हर्बल रंग, चिप्स, पापड़ तैयार किया गया है। समूह की ओर से तैयार किए गए उत्पाद को कानपुर के व्यापारियों ने थोक डिमांड की है। समूह के तैयार उत्पाद अलग- अलग शहरों में बिकेंगे इससे लोकल फॉर वोकल को गति मिलेगी।
कालाकांकर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एके श्रीवास्तव न बताया कि स्वाती, दीपक दुबे ने कुछ दिन पहले ब्लॉक क्षेत्र के ऐंठू गांव के महिला स्वंय सहायता समूह की टीम को हर्बल रंग, अबीर, गुलाल, चिप्स, पापड़ को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया था। इस प्रशिक्षण को अमल कर ऐंठू गांव के धर्मराज मौर्य ने गांव की महिलाओं के साथ ही स्वयं सहायता समूह की मदद से हरी सब्जी जैसे पालक, चुकंदर व हल्दी की मदद से रंग तैयार कराया।
स्वयं सहायता समूह की ओर से आलू की मदद से अलग- अलग प्रकार के स्वाद वाले चिप्स व पापड़ भी तैयार किये गये। पहले इस उत्पाद को धर्मराज ने क्षेत्र की बाजारों की दुकानों पर बिक्री के लिए भेजा तो सफलता मिली। बाद में छोटे व्यापारियों से संपर्क के बाद कानपुर के व्यापारियों ने धर्मराज से संवाद कर उसके उत्पाद की थोक डिमांड की है।
स्वयं सहायता समूह की ओर से तैयार किया गया यह सभी उत्पाद कानपुर की बाजारों में पहुंच गया है। जिले के अलग- अलग ब्लॉक क्षेत्र में सक्रिय महिला स्वंय सहायता समूह की ओर से तैयार किया गया चिप्स, पापड़ व रंग शहर के साथ ही तहसील मुख्यालय की बाजारों में बिक रहा है। इस बार किराना व्यापारी भी जिले में तैयार खाद्य उत्पाद की खरीदारी कर बिक्री करने में रुचि दिखाई है।
00
रासयनिक रंग से बनाएं दूरी, अबीर गुलाल से खेले होली
- बाजार में बिक रहे हानिकारक रंग, आंखों की रोशनी के साथ त्वचा रोग से हो सकते हैं परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। होली के पर्व पर रासायनिक रंग का इस्तेमाल लोगों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। इसका संताप आजीवन भुगतना पड़ सकता है। ऐसे में लोगों को अबीर व गुलाल का प्रयोग करना चाहिए। बाजार में बिक रहे केमिकल युक्त रंग से दूरी बनाना चाहिए। जो आंख व शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
लाल गुलाल रंगों से खेलने वाला त्योहार होली खुशियों व प्यार का प्रतीक व हिदुओं का पवित्र त्योहार है, लेकिन होली के त्योहार में लाल गुलाल रंगों से खेलते समय हमें अपना ध्यान रखना चाहिए व होली खेलते समय हमें सावधानी इस्तेमाल करनी चाहिए।
मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ.अमित पांडेय ने कहा कि होली खेलते समय खासकर बच्चों का आवश्यक ख्याल रखें, उन्हें पानी से होली खेलने की बजाय सूखे रंगों से होली खेलने के लिए प्रेरित करें क्योंकि ठंडा मौसम होने के कारण पानी से होली खेलने से बच्चों के बीमार होने का डर बना रहता है।
बाजार में रसायनिक रंगों में सीसा, टेट्राथिलिन, बेंजिंन व अन्य सुगंधित पदार्थ मिले होते हैं जो त्वचा को सूखा बना देते हैं। लाल, काले व हरे जैसे गहरे रंगों में भारी मात्रा में मरकरी सल्फाइट, सीसा, ऑक्साइड व कॉपर सल्फेट मिले होते हैं जिनसे स्किन कैंसर भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों को रंगों से एलर्जी है, वह होली खेलने से परहेज करें।
अचानक या अनजाने में फेस पर रंग लगने पर जल्द अपना मुंह साफ पानी से धो लें, रंग खेलने के पहले नारियल का तेल लगाए। रंग खेलने के बाद कपड़ा धूलने वाले साबून से भूल से रंग न छुड़ाए। स्नान करने वाले साबून से रंग को छुड़ाए, रूसा पन होने पर फिर से नारियल का ही तेल लगाए। ताकि किसी भी तरह की इंफेक्शन से बच सके। चमड़ी पर एलर्जी हो तो डॉक्टर से सलाह लेकर इलाज कराए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर की राय लिए कोई घरेलू उपचार भी नहीं करना चाहिए।
इनसेट
आंखों का रखें खास ख्याल :डॉ. विवेक त्रिपाठी
राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के नेत्र सर्जन डॉ. विवेक त्रिपाठी ने बताया कि आजकल मार्केट केमिकल से बने रंगों की भरमार है। जिससे होली खेलने पर यह रंग आंखों व शरीर पर लगने से जहां अंधापन दे सकते है, तो वहीं शारीरिक कष्ट का कारण भी बन सकता हैं। उन्होंने कहा कि होली खेलते समय आंखों पर डे नाईट व जरनल चश्मे लगा कर ही होली खेलें। अगर आंखों में रंग पड़ जाए तो आंखों को मलें नहीं, तुरंत आंखों को साफ पानी से धोना चाहिए। होली खेलते समय कोई भी खाद्य पदार्थ न खाए क्योंकि रंगों से सटे चेहरे पर कुछ भी खाने से रंग मुंह के द्वारा पेट में जा सकता है। जिससे पेट की गंभीर बीमारियों के लगने का खतरा बन सकता है।
इनसेट-
कैसे करें केमिकल युक्त रंग की पहचान
डॉक्टर अमित पांडेय ने बताया कि केमिकल युक्त रंग दरबर होते हैं। जिसमें केमिकल नहीं होता है वह सॉफ्ट होता है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा हॉनिकारक इन दिनों बाजार में बिक रहे चेहरे पर लगाने लेप करने वाले रंग होते हैं।
होली के रंग आसानी से हट जाए इसके लिए आपको गर्म की जगह ठंडे पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। ठंडे पानी से रंग जल्दी हट जाते हैं। रंग एक ही बार में साफ करने से नहीं हटेंगे। इसलिए बार-बार फेस वॉश न करें। ऐसा करने से आपकी स्किन ड्राई हो जाएगी। इस बात का भी खास ध्यान रखें कि होली के बाद किसी भी तरह का ट्रीटमेंट न लें। इसमें हेयर स्पा, फेशियल और ब्लीच शामिल है। कम से कम दो हफ्ते का अंतर लें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें