जिला अस्पताल के मर्चरी का फ्रीजर करीब दो वर्ष से खराब पड़ा हुआ है। ऐसे में अज्ञात शवों को खुले में 72 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। इससे शव से दुर्गंध उठने लगती है। इस ओर जिम्मेदार लोगों का ध्यान नहीं पड़ रहा है। लाखों रुपये की मशीन इन दिनों शोपीस बनी हुई है। गर्मी के दिनों में 18 से 20 घंटे से ज्यादा शव रखने पर उससे दुर्गंध उठने लगती है। शव सड़ना शुरू हो जाता है। इसके चलते लोग परेशान हो जाते हैं। इन समस्या को देखते हुए करीब चार वर्ष पहले स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में बने मर्चरी में लाखों रुपये खर्च करके शव फ्रीजर लगवाया था। इस फ्रीजर में एक साथ दो शव को रखा जा सकता है। फ्रीजर चलने से शव सड़ने व उससे दुर्गंध उठने की आशंका नहीं रहती है। मगर करीब दो वर्ष से मर्चरी में लगा शव फ्रीजर खराब पड़ा हुआ है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं पड़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मचारी शव को मर्चरी के अंदर रखकर ताला बंद करके चले जाते हैं। 20 से 24 घंटे के अंदर शव से दुर्गंध उठने लगती है। लाश सड़ने लगती है। मगर अधिकारी उसे बनवाने के लिए कोई कवायद नहीं कर रहे हैं।