पंचायत चुनाव में प्रधान पदों के आरक्षण को लेकर राजनैतिक दलों का मंसूबा सूबे की सपा सरकार जानना चाहती है। जिस आरक्षण को लागू कर सरकार चुनाव कराना चाहती है, उसका कौन से दल विरोध कर सकते हैं, ऐसे लोगों की कुंडली तलब की गई है। शासन ने खुफिया विभाग से पंचायत चुनाव को लेकर जनता व राजनैतिक दलों की राय जानने व विरोध करने वालों की सूची मांगी है। सरकार का आदेश मिलते ही खुफिया विभाग अलर्ट हो गया है।
सूत्रों की मानें तो शासन यह जानने की कोशिश कर रहा है कि प्रधान पद के आरक्षण की व्यवस्था जो सरकार जारी करना चाहती है, उससे किसका अधिक लाभ होगा। उस आरक्षण का विरोध कौन-कौन से राजनैतिक दल करेंगे और उन्हें इसका कितना फायदा मिलेगा। इसके अलावा आरक्षण को लेकर जनता के बीच क्या चल रहा है। शासन प्रधान पद के आरक्षण को लेकर माथापच्ची कर रहा है, लेकिन अमली जामा पहनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसलिए खुफिया विभाग से हर जिलों की रिपोर्ट मांगी है, ताकि आरक्षण का फार्मूला ऐसा लागू हो, जिससे दूसरे राजनैतिक दलों को लाभ न मिल सके। सरकार के आरक्षण फार्मूले को लेकर केवल भाजपा के लोग ही सामने आ रहे हैं। बसपा, कांग्रेस, अद समेत दूसरे दलों के लोगों की प्रतिक्रिया कम देखने को मिल रही है। बल्कि जनता में आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर खासी नाराजगी जरूर है। बार-बार टल रहे प्रधान पदों के आरक्षण को लेकर जनता अब कहने लगी है कि सरकार अपनों को मुखिया बनाने के लिए आरक्षण में विलंब कर रही है।