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शुद्ध हिंदी भी नहीं जानता सरकारी महकमा

Sun, 13 Sep 2015 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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बेल्हा में कई सरकारी विभागों के लोग ही हिंदी का मजाक बना रहे हैं। कई कार्यालयों में हिंदी में लिखे शब्द गलत हैं। इसके बावजूद अधिकारी उसे शुद्ध मान रहे हैं। केवल हिंदी दिवस पर ही तमाम भाषणबाजी और हिंदी के उत्थान का संकल्प लेने का इरादा लोग जताते हैं, लेकिन हकीकत कोसों दूर दिखाई पड़ती है।
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हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। अजीत नगर स्थित हिंदी भवन कार्यालय के साथ जनपद में विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इसी दिन लोगों को हिंदी की अधिक चिंता सताती है। इसके बाद लोग हिंदी के उत्थान के लिए किए सारे वादे भूल जाते हैं। सहकारिता से जुड़े जिला सहकारी बैंक में ऐसा ही कुछ दिखाई पड़ता है। बैंक में प्रवेश करते ही पोर्टिको के ऊपर बैंक के नाम की पट्टिका लगाई गई है। जिसमें प्रतापगढ़ के स्थान पर ‘प्रताबगढ़’ लिखा गया है।

हर दिन इस पर अधिकारियों व जिम्मेदारों की निगाह पड़ती है, लेकिन वे इस खामी को दूर करना नहीं चाहते या फिर इसे ही शुद्ध समझते हैं। रविवार होने के नाते प्रबंधक से बात नहीं हो सकी। इसी तरह सई पुल के करीब नेशनल हाईवे की ओर से दूसरे जनपदों की दूरी के लिए बोर्ड लगाया गया है। बोर्ड में बड़े-बड़े अक्षरों में ‘अयोध्य’ लिखा गया, जबकि इसे अयोध्या होना चाहिए था। कमोवेश यही हाल विकास भवन, कलक्ट्रेट व अस्पतालों में भी दिखाई पड़ता है। केवल हिंदी दिवस के दिन ही हिंदी के उत्थान और उसके सम्मान की बातें होती हैं। ऐसे लोगों को शुद्ध हिंदी न लिखने वाले विभागों को भी सतर्क करना चाहिए। ताकि शुद्ध भाषा का प्रयोग हो सके।
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