पंचायत चुनाव आते ही असलहों का भी बाजार गर्म हो गया है। देसी से लेकर विदेशी मॉडल के असलहे का कारोबार तेजी पकड़ने लगा है। कुछ लोग असलहे अपनी सुरक्षा के लिए खरीद रहे हैं तो कुछ अपनी हनक पानी जमाने के लिए। ऐसा नहीं कि अवैध असलहों के कारोबार की जानकारी पुलिस को नहीं है, पर पुलिस हमेशा की तरह चुप्पी साधे हुए है।
हर चुनाव के पूर्व असलहों की मंडी गंगा के कछार, लालगंज, रानीगंज, जेठवारा व मानधाता में सजती है। मगर पंचायत चुनाव में अवैध असलहों की खपत कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। कई जगह देसी असलहे बनाए जाते हैं तो तमाम लोग बिहार से मेड इन चाइना या जापान लिखा हुआ विदेशी मॉडल का असलहा लाकर बेचते हैं। असलहों के अवैध बाजार में पिस्टल, रिवाल्वर, तमंचा बारह बोर, तीन सौ पंद्रह, अद्धी बेची जा रही है। इन असलहों की कीमत तय हैं। सबसे अधिक विदेशी मॉडल के माउजर और पिस्टल की डिमांड है।
इसकी कीमत बीस से लेकर चालीस हजार के बीच है। तमंचे की कीमत पांच हजार तक है और रिवाल्वर का दाम भी सात से लेकर दस हजार के आसपास है। इसके साथ लोगों को कारतूस भी दिया जाता है। बताते हैं कि असलहों के सौदागर पहले ग्राहकों को असलहों का ट्रायल कराते हैं। इसके बाद लोगों को असलहे देते हैं। ताकि खराबी आने पर उनकी कोई जिम्मेदारी न रहे। चुनाव के पहले असलहों की मंडी सजने व बिक्री की खबर पुलिस प्रशासन को भी है लेकिन पुलिस अभी मौन है।