कोतवाली के एक दरोगा की लापरवाही ने एसपी को परेशानी में डाल दिया है। युवती के कलमबंद बयान की कापी दाखिल नहीं करने पर एसपी को हाईकोर्ट ने तलब कर लिया है। नाराज हाईकोर्ट ने 17 हजार का जुर्माना भी ठोंका है। लापरवाही बरतने पर एसपी ने दरोगा समेत पूर्व विवेचक को सस्पेंड कर दिया है। एसपी की कार्रवाई से पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया है।
लालगंज कोतवाली के हंडौर गांव से लगभग छह माह पहले एक युवती किसी युवक के साथ भाग गई। मामले में युवती के पिता ने युवक के खिलाफ अपहरण के आरोप में रिपोर्ट दर्ज करा दी। कुछ दिनों बाद युवती को ढूंढ निकाला गया। जांच में वह बालिग निकल गई तो मुकदमे के विवेचक रामअवतार वर्मा ने सिविल कोर्ट में कलमबंद बयान करा दिया। युवती के पिता को बयान की कापी उपलब्ध नहीं हो सकी तो वह हाईकोर्ट पहुंच गया। इसके बाद हाईकोर्ट ने युवती के बयान की कापी तलब कर ली। इस बीच विवेचक का तबादला हथिगवां थाने में हो गया तो हाईकोर्ट में मामले की देखभाल का जिम्मा कोतवाली के दरोगा धनंजय सिंह को दिया गया।
बार-बार कहने बाद भी दरोगा ने हाईकोर्ट में युवती का बयान दाखिल नहीं किया। सूत्रों की मानें तो दरोगा ने कई बार सरकारी छुट्टी भी ले ली, मगर कोर्ट को गुमराह करते रहे। इस पर हाईकोर्ट ने एसपी को 21 अगस्त को बयान की कापी के साथ तलब कर लिया और लापरवाही बरतने पर 17 हजार का जुर्माना भी ठोक दिया। नाराज एसपी ने लापरवाही बरतने वाले दरोगा धनन्जय सिंह को निलंबित कर दिया। कार्य में शिथिलता पाए जाने पर पूर्व विवेचक रामअवतार वर्मा को भी पुलिस अधीक्षक ने सस्पेंड कर दिया। एसपी द्वारा दो दरोगाओं को निलंबित किए जाने से पुलिस कर्मियों में हड़कंप मच गया है। इस बाबत कोतवाल सुरेशप्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि लापरवाही पाए जाने पर दरोगा के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है। उनको थाने से रिलीव कर पुलिस लाइन भेज दिया गया है।