पुलिस उसके ठिकाने पर दबिश देती रही लेकिन वह नहीं मिला। उसकी मां ने भी अपना ठिकाना बदल दिया था। इस बीच 15 मई को जिले में कदम रखने वाले गुफरान ने अपने ही साथी तनवीर की लूट के रुपये के विवाद में गोली मारकर हत्या कर दी। चूंकि मृतक साथी ने दम तोड़ने से पहले कई बार गुफरान का नाम लिया था। इसलिए पुलिस उसके पीछे पड़ गई। फिर भी वह हाथ न लगा।
जिले में आतंक का पर्याय बन रहे गुफरान की पुलिस व एसटीएफ तलाश करने लगी। घटना के दस दिन बाद पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। कुछ दिनों बाद इनाम की राशि 50 हजार हो गई। डीजीपी ने 25 जून को उस पर एक लाख का इनाम घोषित कर दिया। 32 दिन के बाद भी जिले में आतंक का पर्याय बन रहे गुफरान को पुलिस ने चुनौती के रूप में लिया।
मोबाइल कम, इंस्टाग्राम पर असलहों के साथ फोटो करता था अपलोड
कौशांबी में एसटीएफ के साथ मठभेड में मारे गए सवा लाख के इनामी गुफरान मोबाइल बहुत कम इस्तेमाल करता था। वह इंस्टाग्राम पर केवल असलहों के साथ फोटो अपलोड करता था। जिसमे प्रतिबंधित पिस्टल, तलवार, कारतूस की मैगजीन नजर आती थी। सूत्रों के अनुसार शहर की कई लड़कियों से वह बातचीत भी करता था। कभी कभार उनसे बातचीत करने के लिए दोस्तों के मोबाइल का प्रयोग करता था। वह घटनाओं के बाद अपनी वेशभूषा भी बदल लिया करता था। ताकि वह पहचान में न आ सके।
ननिहाल में गुफरान के शव को किया सुपुर्दे खाक, सीएम से शिकायत
एसटीएफ से मुठभेड़ में ढेर सवा लाख के इनामी बदमाश गुफरान का शव लेकर मां नसरीन मंगलवार की देर रात घर पहुंचीं। परिजन रोते बिलखते रहे। बुधवार को करीब दस बजे गुफरान के शव को गांव के ही कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया गया। एहतियात के तौर पर लीलापुर पुलिस मुस्तैद रही। मां नसरीन को पति रिजवान संभालता रहा। इधर गुफरान की मां नसरीन ने मुख्यमंत्री व डीजीपी को शिकायती पत्र भेजते हुए आरोप लगाया है कि उसके बेटे को घर से उठाकर ले जाया गया। उसे मुठभेड़ में मारने के लिए एसटीएफ के एक सिपाही ने धमकी दी थी।