शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत स्कूल में चयन के बावजूद बच्चों का दाखिला न कराने वाले अभिभावकों को अब शपथ पत्र देना होगा। शपथ पत्र में दाखिला न कराने का कारण स्पष्ट करना होगा। जिससे दूसरे विद्यार्थियों को दाखिला दिया जा सके।
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित की गईं हैं। इस बार 542 निजी स्कूलों की 2,938 सीटों पर दाखिले होने हैं। आरटीई के तहत आवेदन की प्रक्रिया एक अप्रैल से शुरू हो गई है। आवेदनों के सत्यापन के बाद बच्चों को विद्यालय आवंटित किया गया। प्रथम चरण में 680 बच्चों का निजी विद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया पूरी हो गई है। दूसरे और तीसरे चरण में निजी विद्यालयों में दाखिले के लिए 981 बच्चों का चयन किया गया है। मगर, लोकसभा चुनाव के कारण आचार संहिता लागू होने से प्रवेश प्रक्रिया लंबित थी। अब चौथे चरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
पिछले वर्ष कई मामले ऐसे सामने आए थे, जिसमें स्कूल में नामांकन होने के बाद भी अभिभावकों ने बच्चों का प्रवेश स्कूल में नहीं कराया था। जिस वजह से कई स्कूलों में सीटें खाली रह गईं थीं। इस वजह से इस बार बच्चों को प्रवेश न दिलाने वाले अभिभावकों को शपथ देना होगा। बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारियों को ब्यौरा जुटाने का निर्देश दिया गया है। रिक्त सीटों को भरने की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।