जिला पंचायत सदस्य पद की पंद्रह सीटों पर आरक्षण में हुए बदलाव को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चा है। लोग दबी जुबान से कह रहे हैं कि आरक्षण बदलवाने में माननीयों की भूमिका है। अंतिम सूची प्रकाशन के बाद हर कोई यह कहता रहा कि आखिर माननीयों का दबाव काम कर गया। कई प्रत्याशियों ने तो सोमवार रात से ही पसीना बहाना बंद कर दिया।
इस बार परिसीमन के बाद जिले में कुल 61 जिला पंचायत सदस्य की सीटें हो गई है। पहले 52 सीटें थी। इस बार किसी ब्लाक में तीन तो किसी में ब्लाक में पांच जिपं सदस्य की सीट हो गई है। आरक्षण की अनंतिम सूची के बाद दावेदार क्षेत्र में पसीना बहाने लगे थे। सोमवार की देर रात जिपं सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य के पदों के आरक्षण की सूची का प्रकाशन हुआ तो लोग दंग रह गए।
इस बार पंद्रह सीटों पर बदलाव किया गया था। इसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया कि माननीयों ने अपनी इच्छा के अनुरूप दबाव डालकर सीटों में बदलाव करा लिया। सबसे खास बात यह है कि संडवाचंद्रिका प्रथम अभी तक अनारक्षित थी, लेकिन अंतिम सूची में वह पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित कर दी गई है। लोगों का कहना है कि जिन इलाके की सीटों में हेरफेर हुआ है, वहां माननीय अपने मनपसंद को मैदान में उतारने की मंशा पाले हुए हैं।