ग्राम पंचायतों में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों और पंचायत भवनों की गुणवत्ता की जांच पंचायती राज विभाग ने शुरू कर दी है। साथ ही इनका निर्माण करने वाले फर्मों की भी जांच की जाएगी। 20 लाख अधिक खर्च करने वाली निजी फर्मों को चिह्नित किया जा रहा है। अनियमितता मिलने पर फर्म को काली सूची में डाला जाएगा और पंचायत सचिव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी होगी।
जनपद की 1143 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों के साथ पंचायत भवनों का निर्माण किया गया है। कुछ में निर्माण चल रहा है। एक पंचायत भवन के निर्माण में करीब 20 लाख व सामुदायिक शौचालय के निर्माण में 10 से 15 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इन भवनों की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने सवाल भी उठाए हैं।
अब पंचायती राज विभाग की ओर से पंचायत भवनों और सामुदायिक शौचालयों की जांच की जाएगी। साथ ही फर्म के काम की गुणवत्ता भी देखी जाएगी। अगर अनियमितता मिलती है तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा। संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। डीपीआरओ श्रीकांत दर्वे ने बताया कि 20 लाख रुपये से अधिक खर्च करने वाली ग्राम पंचायत और निजी फर्म की सूची तैयार की जा रही है। जांच के बाद अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।