मानिकपुर के सहिली गांव के बड़ेलाल पांडेय ने अधिवक्ता की ओर से न्यायालय में प्रकीर्ण वाद प्रस्तुत कर बताया था कि यूट्यूब चैनल पर 13 जून को उसने प्रदेश सरकार की ओर से जारी धर्मस्थलों के आसपास पत्थरबाजी की घटना के बाद सेना की तैनाती वाला फर्जी वीडियो देखा। जबकि वीडियो कई वर्ष पुराना कश्मीर की घटना का था। ऐसे वायरल वीडियो से समाज में तनाव फैलने की आशंका रहती है।
आरोपी अभियुक्तों ने राष्ट्रीय न्यूज चैनल के ट्रेडमार्क को चोरी कर कुछ घटनाओं का वीडियो अपने गैर मान्यता प्राप्त यूट्यूब पर अपलोड कर दिया था। जिसमे करीब आठ कथित पत्रकारों का गिरोह शामिल था। वह एक सरकारी कार्यालय में अपने काम से गया था। उसकी तस्वीर सीसीटीवी में कैद थी।
आरोपियों की ओर से हरे पेड़ की कटान का आरोप लगाकर उसके खिलाफ खबर बनाकर वायरल किया गया। जिससे समाज में उसकी छवि धूमिल हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने मानिकपुर पुलिस को पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।