प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय में चुनौती मूल्यांकन की व्यवस्था को लागू कर दिया गया है। राज्य विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति ने यह निर्णय लिया है। यह व्यवस्था राज्य विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों में भी लागू होगी। इसके तहत छात्र अपनी कॉपियों के मूल्यांकन से असंतुष्ट होने पर चुनौती दे सकेंगे।
इस व्यवस्था के तहत पहले चरण में छात्रों को मूल्यांकित मूल उत्तर पुस्तिका की दूसरी कॉपी देखने की सुविधा मिलेगी। दूसरे चरण में मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका देखने के बाद छात्र अगर मूल्यांकन से असंतुष्ट हैं तो पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की सुविधा मिलेगी। पहले चरण के लिए आवेदन शुल्क 300 रुपये प्रति प्रश्नपत्र होगा।
पहले चरण में परीक्षार्थी को परीक्षा परिणाम जारी होने के 30 दिनों के अंदर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। दूसरे चरण के तहत 45 दिनों के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। दूसरे चरण के तहत चुनौती मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्नपत्र 2500 रुपये शुल्क जमा करना होगा। पुनर्मूल्यांकन के लिए किन्हीं दो विशेषज्ञों/परीक्षकों का चयन कुलपति करेंगे।
दोनों विशेषज्ञों की ओर से दिए गए प्राप्तांकों को औसत निकाला जाएगा। यह औसत अंतिम रूप से स्वीकृत होगा, चाहे वह मूल प्राप्तांकों से कम हो या अधिक। अगर औसत और मूल प्राप्तांकों में 20 फीसदी से अधिक अंतर होता है तो परीक्षार्थी की ओर से शुल्क के रूप में जमा किए गए ढाई हजार रुपये में एक हजार रुपये काटकर शेष धनराशि परीक्षार्थी को लौटा दी जाएगी।